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डाउनलोड करेंलखनऊ. व्यापम घोटाले के आरोपी गिरफ्तार छात्रों को केजीएमयूप्रशासन ने निलंबित कर दिया है।पिछले दिनों एसटीएफ ने नौ छात्रों को केजीएमयू से उठाया था। उसमें से तीन को गिरफ्तार जबकि छह को हिरासत में रखने की सूचना है। निलंबित छात्रों की बहाली एसटीएफ के क्लियरेन्स के बाद ही होगी। इस बाबत कॉलेज प्रशासन ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि संस्थान की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए इस तरह के कठोर कदम उठाए गए हैं।
गत मंगलवार को केजीएमयू के टीजी हास्टल के सात छात्रों को और डेंटल के दो छात्रों को एमपी एसटीएफ ने व्यापम घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया था। अभी भी छह छात्र पुलिस की हिरासत में हैं। बताते चलें कि एमसीआई कोटे के तहत एडमिशन में घूसकांड के एक के बाद एक कई मामले उजागर हो रहे हैं। इससे केजीएमयू की साख पर बट्टा लगने की आशंका पैदा होने लगी है।
क्या है पूरा मामला
व्यापम घोटाले की जांच कर रही मध्यप्रदेश की एसटीएफ की टीम केजीएमयू पहुंची थी। वहां विवि के कुलपति प्रो रविकांत से मुलाकात की। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ के अधिकारियों ने इस बाबत विवि के प्राक्टर प्रो. एस येन कुरिल को सहयोग करने के लिए कहा। इसके बाद विवि के सहयोग से टीम ने टीजी हास्टल से 2013 बैच के सात छात्रों को अपने कब्जे में लेकर चली गई। सूत्रों का कहना है कि पूछताछ के दौरान एसटीएफ अपने शक की पुष्टि करना चाह रही है। हालाकि इस मामले पर विवि प्रशासन ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है।
यह है व्यापम घोटाला
वर्ष 2008 से 2010 के बीच मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरियों से जुड़ी दस प्रवेश परीक्षा में धांधली प्रकाश में आई थी। वहीं सात जुलाई 2013 में इंदौर में हुई पीएमटी प्रवेश परीक्षा में कुछ छात्र दूसरे के स्थान पर साल्वर के रूप में परीक्षा देते हुए धरे गए थे। इस मामले में इंदौर के मेडिकल शिक्षक डॉ. जगदीश सागर का नाम सामने आया था। उसमें गिरफ्तारी के दौरान डॉ. सागर के घर से 13 लाख की नगदी और कई बड़ी प्रापर्टी के दस्तावेज और चार किलो सोना बरामद हुआ था। उसी मामले की जांच एसटीएफ कर रही है।
केजीएमयू की फाइल फोटो।
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