फाइल फोटो: एमबीबीएस घोटाले के आरोपी के.पी. सिंह।
लखनऊ. मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरियों से लेकर इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में हुए व्यापम घोटाले की जांच कर रही एसटीएफ की टीम के निशाने पर केपी सिंह भी आ गए हैं। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के माइक्रोबायलॉजी विभाग के डॉ. केपी सिह का नाम एमबीबीएस घोटाले में सामने आया था। सूत्रों की मानें तो, पूछताछ के लिए 2013 बैच के सात छात्रों को उठाने के बाद न्यायिक हिरासत में चल रहे डॉ. केपी सिह को रिमांड पर लेने के लिए एसटीएफ की टीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर सकती है।
बताते चलें, मध्य प्रदेश में एमबीबीएस के तहत 500 से ज्यादा फर्जी एडमिशन के मामले अब तक सामने आ चुके हैं। इसमें मध्य प्रदेश के अलावा दूसरे राज्यों में भी फर्जी एडमिशन कराने का मामला शामिल है। इन घोटालों की व्यापम के तहत हो रही जांच के चलते एडमिशन में जो गैंग शामिल था उसके तार यूपी से भी जुड़े पाए गए हैं।
एमबीबीएस में एडमिशन कराने के मामले में फंसे माइक्रोबायलोजी विभाग के शिक्षक डॉ. केपी सिह पर भी एसटीएफ को संदेह है। सूत्रों का कहना है कि जिस तरह से केपी सिंह इस मामले में फंसे हैं, उससे एसटीएफ को पूरी तौर पर आशंका है कि गिरोह के सदस्यों का संपर्क इनसे हो सकता है। हालांकि, अभी तक एसटीएफ ने इस मामले में कोई खुलासा नहीं किया गया है।
इन आरोपों से घिरे है केपी सिंह
अंतिम चरण की काउंसलिग से पहले मेडिकल में एमसीआई कोटे के तहत एडमिशन कराने के मामले में डॉ. केपी सिंह पर पैसे लेकर एडमिशन कराने का आरोप है। उनके खिलाफ नोएडा में पांच और चौक में दो मामले दर्ज थे। इसके अलावा बिहार के वैशाली निवासी मधु ज्योति नाम की एक छात्रा ने दाखिला दिलाने के नाम पर 13 लाख रुपए की ठगी का मुकदमा दर्ज कराया है।
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