लखनऊ. मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरियों में हुए घोटाले को लेकर चर्चित 'व्यापम घोटाले' की आग मंगलवार को लखनऊ तक पहुंच गई। घोटाले की जाचं कर रही मध्यप्रदेश की एसटीएफ की टीम ने किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के 2013 बैच के सात छात्रों को पूछताछ के लिए उठा लिया। हालांकि, केजीएमयू प्रशासन ने पूरे मामले पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया है।
व्यापम घोटाले की जांच कर रही मध्यप्रदेश की एसटीएफ की टीम मंगलवार को केजीएमयू पहुंची। यहां पहुंचने के बाद टीम के सदस्यों ने कुलपति प्रो. रविकांत से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान टीम के सदस्यों ने आने के प्रयोजन के बारे में बताया। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ के अधिकारियों ने इस बावत केजीएमयू के प्रॉक्टर प्रो. एसएन कुरिल को सहयोग करने के लिए कहा। इसके बाद केजीएमयू के सहयोग से टीम टीजी हॉस्टल से 2013 बैच के सात छात्रों को अपने कब्जे में लेकर चली गई।
एसटीएफ को शक है कि कहीं इन छात्रों ने मेडिकल में हुई भर्तियों को लेकर आरोपियों के स्थान पर परीक्षाएं तो नहीं दी है। या मेडिकल की प्रवेश परीक्षा में तो किसी तरह की संलिप्तता तो नहीं है। सूत्रों का कहना है कि एसटीएफ पूछताछ के दौरान अपने शक की पुष्टि करना चाह रही है। वही, इस मामले पर केजीएमयू प्रशासन ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है।
क्या है व्यापम घोटाला
साल 2008 से 2010 के बीच मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरियों से जुड़ी दस प्रवेश परीक्षा में धांधली प्रकाश में आई थी। वहीं, सात जुलाई साल 2013 में इंदौर में हुई पीएमटी प्रवेश परीक्षा में कुछ छात्र दूसरे के स्थान पर सॉल्वर के रूप में परीक्षा देते हुए धरे गए थे। इस मामले में इंदौर के मेडिकल टीचर डॉ. जगदीश सागर का नाम सामने आया था। इसमें गिरफ्तारी के दौरान डॉ. सागर के घर से 13 लाख की नगदी और कई बड़ी प्रापर्टी के दस्तावेज और चार किलो सोना बरामद हुआ था। इसी मामले की जांच एसटीएफ कर रही है। इससे पूर्व मेडिकल और इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा में हुए फर्जीवाड़े का आरोप तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा का नाम सामने आया था और उनकी गिरफ्तारी हुई थी। मामले की आंच सीएम
शिवराज सिंह तक पहुंची थी। इसमें उमा भारती पर भी आरोप लग चुके हैं।
केजीएमयू की फाइल फोटो