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बेसि‍क लाइफ सपोर्ट सिस्टम से बच सकती है 70 फीसदी मरीजों की जान

7 वर्ष पहले
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फाइल फोटो: केजीएमयू में लाइफ सपोर्ट सिस्टम की ट्रेनिंग देतीं डॉ. रजनी गुप्ता।
वर्ल्‍ड पेशेंट सेफ्टी डे: बीमारि‍यों के प्रति लोगों में जागरुकता फैलाने के लि‍ए हर साल 9 दि‍संबर को 'वर्ल्‍ड पेशेंट सेफ्टी डे' मनाया जाता है। इसका मकसद यह है कि बेहतर जीवनशैली अपनाकर लोग स्‍वस्‍थ्‍ा रहें। इस अवसर पर dainikbhaskar.com आपको वि‍भि‍न्‍न बीमारि‍यों और उनसे बचने के उपायों के बारे में बताने जा रहा है।

लखनऊ. भारत में हर साल सड़क दुर्घटना या प्राकृतिक हादसे में काफी संख्‍या में लोग अपनी जान गवां देते हैं। वहीं, यदि सही समय पर उन्‍हें प्राथमिक इलाज (बेसिक लाइफ सपोर्ट सिस्‍टम) दिया जाए तो 70 फीसदी मरीजों को बचाया जा सकता है। इसके लिए टाइम मैनेजमेंट बहुत जरूरी है। इस बारे में जानकरी और जागरुक करने के लिए किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) ट्रेनिंग दे रहा है। इसमें डॉक्‍टरों से लेकर बाहरी लोगों को भी शामिल किया जा रहा है।

अमेरि‍कन हार्ट एसोसि‍एशन की ट्रेनर और एनि‍स्‍थि‍सि‍या वि‍भाग की एसोसि‍एट प्रोफेसर डॉ. रजनी गुप्‍ता ने बताया कि हर साल भारत में हार्ट अटैक की वजह से काफी संख्‍या में लोगों की मौत होती है। ऐसी अवस्‍था में यदि उनके आस-पास का व्‍यक्‍ति मरीज को बेसि‍क लाइफ सपोर्ट सि‍स्‍टम देता है तो इससे मरीज की जान बचने की संभावना दो से तीन गुना बढ़ जाती है। जागरुकता के अभाव में लोग इसका प्रयोग नहीं कर पाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि सभी लोगों को इस बारे में प्रशि‍क्षि‍त किया जाए। उन्‍होंने बताया कि बेसि‍क लाइफ सपोर्ट सि‍स्‍टम के बारे में डॉक्‍टरों सहि‍त आम जनता को प्रशि‍क्षि‍त करने के लि‍ए हर शनि‍वार को अनिवार्य रूप से और रविवार को वैकल्‍पि‍क तौर पर ट्रेनिंग दी जा रही है।

दो सौ रुपए शुल्‍क में कोई भी ले सकता है प्रशि‍क्षण

डॉ. रजनी गुप्‍ता के मुताबि‍क, प्रशि‍क्षण के लि‍ए दो सौ रुपए शुल्‍क निर्धारित कि‍या गया है। यह शुल्‍क जमा कर आम लोग, डॉक्‍टर्स या फि‍र स्‍थानीय प्रशासन से जुड़े लोग इस बारे में प्रशि‍क्षण प्राप्‍त कर सकते हैं। उन्‍होंने बताया कि तीन घंटे के प्रशि‍क्षण कार्यक्रम में लोगों को बेसि‍क लाइफ सपोर्ट सि‍स्‍टम के बारे में जानकारी देने के बाद परीक्षाएं ली जाती हैं। इसके बाद संबंधि‍त व्‍यक्‍ति या डॉक्‍टर को सर्टि‍फि‍केट उपलब्‍ध कराया जाता है।
2010 में शुरू की गई थी ट्रेनिंग

डॉ. रजनी ने बताया कि ट्रेनिं‍ग का कार्यक्रम साल 2010 में शुरू कि‍या गया था, लेकिन किन्‍हीं कारणों से इसे बीच में स्‍थगि‍त कर दि‍या गया था। वहीं, जब से केजीएमयू कुलपति प्रो. रविकांत ने जि‍म्‍मेदारी संभाली है तब से उनकी तरफ से इस पर ध्‍यान दिया गया। कुलपति की ओर से परि‍सर में जगह-जगह पर ऑटोमेटेड एक्‍सटर्नल डि‍फि‍ब्ररीलेटर लगाने के भी निर्देश दि‍ए गए हैं।

आगे पढ़िए पुलिस विभाग की भी दी जाएगी ट्रेनिंग...