तस्वीर में: दुनिया के सात अरबवें बच्चे का प्रतीक नर्गिस।
लखनऊ. जिस बच्ची के जन्म पर दुनिया में तहलका मचा था, आज वो गुमनामी का जीवन जी रही है। जब वह मां की कोख से बाहर आई तो दुनिया के सात अरबवें बच्चे का प्रतीक बन गई थी। उसके मां-बाप को ढेरों बधाइयां मिली थीं। लेकिन आज उसका सुध लेने वाला कोई नहीं है।
तीन साल पहले संयुक्त राष्ट्र संघ ने घोषणा की थी कि दुनिया का सात अरबवां बच्चा या तो भारत में पैदा होगा या फिर चीन में। इसलिए भारत में सात अरबवें बच्चे के जन्म को लेकर काफी उत्साह का माहौल था। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े एनजीओ प्लान इंडिया और वात्सल्य ने लखनऊ के मॉल विकासखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर जश्न का माहौल तैयार किया था।
31 अक्टूबर 2010 को सुबह सात बजकर पच्चीस मिनट पर ग्राम गुनौर के रहने वाले अजय यादव उर्फ मुलायम यादव की पत्नी कविता ने सीएचसी पर एक बच्ची को जन्म दिया। उसे नर्गिस नाम दिया गया और उसने प्रतीकात्मक रूप से दुनिया में सात अरबवें बच्चे के रूप में ख्याति अर्जित कर ली थी। उसके माता-पिता को ढेर सारी बधाइयां और शगुन के रूप में नर्गिस के लिए कपड़े मिले।
आज जीवन के चौथे बसंत में चल रही उसी नर्गिस का हालचाल लेने के लिए न तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को फुर्सत है और न ही किसी स्वयंसेवी संस्था को। वर्तमान में वह किस हाल में है, इसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं। उसका घर गुनौर गांव की तंग गलियों में है। वहां आज भी उसका बचपन बीत रहा है।
आगे पढ़िए खेती पर निर्भर हैं नर्गिस के माता-पिता...