देवी के दर्शन से दूर हो जाते हैं संदेह, पूरी होती है हर मनोकामना

8 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
लखनऊ. कहते है की मां के चरणो में पूरा संसार समाया हुआ है। उनके चरणों में मत्था टेक कर हर मुराद पूरी होती है। लखनऊ में एक ऐसा ही मंदिर हैं। यहां मां का दर्शन करने से सारे संदेह दूर हो जाते हैं। भक्त की हर मनोकामना पूरी होती है। खासबात ये है कि संदोहन मंदिर में मां के भव्य दर्शन नवरात्र के बाद पड़ने वाली एकादशी को ही होते हैं।
लखनऊ के चौपटियां स्थित संधोहरण या संदोहन देवी मंदिर मां के भक्तों की आस्था का एक बड़ा केंद्र है। मंदिर के पुजारी ब्रजमोहन लाल शुक्ला ने बताया कि लगभग 700 साल पहले यहां एक संत रहते थे। नवरात्र के दौरान मां ने उन्हें सपने में दर्शन दिए थे। सपने में मां ने संत से कहा कि तालाब में पिंड है, उसे निकालकर स्थापित करो।
संत ने कुछ भक्तों के साथ मिलकर पिंड की खोज की। किसी को भी देवी का पिंड नहीं मिला। आखिर में संत जब कुण्ड की गहराई में गए तो उन्हें पिंड मिल गई। इसकी स्थापना उन्होंने इसी जगह कर दी। जिस दिन मां की पिंड स्थापित हुई, संयोग से वह एकादशी का दिन था। बाद में संत ने इसी जगह समाधि ली थी।
दर्शन करने से होती है हर मनोकामना पूरी
मां की पिंड को जितनी बार भी बिठाया गया, हर बार लेट जाती थी। इसीलिए लेटी अवस्था में ही मां की पिंड की स्थापना की गई। ऐसी मान्यता है कि एकादशी को दर्शन कर भक्त की हर मनोकामना पूरी होती है। मां संदोहन यानि हर तरह के संदेह का अंत करने वाली मां का जिक्र ललिता सहस्त्रनाम में में भी आता है।
आगे पढ़िए, साल में दो बार होते हैं मां के चरणो के दर्शन...