यादव सिंह की फाइल फोटो।
लखनऊ. नोएडा विकास प्राधिकरण के निलंबित मुख्य अभियंता यादव सिंह की बेशुमार काली कमाई की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है उसके आय के साधनों से भी पर्दा उठ रहा है। रियल स्टेट और शराब के कारोबार के बाद अब उसकी करोड़ों रुपए की काली कमाई का एक मामला उजागर हुआ है। बताया जा रहा है कि लखनऊ की तीन बड़ी पान-मसाला फैक्ट्रियों में भी यादव की संपत्ति लगी है जिसका कारोबार प्रतिवर्ष सौ करोड़ रुपए तक का है।
बताते चलें कि इस मामले के सामने आने के बाद आयकर विभाग की जांच टीम ने केन्द्रीय उत्पाद शुल्क और वाणिज्यकर विभाग से इन फैक्ट्रियों से जुड़ी जानकारी मांगी है। माना जा रहा है कि राज्य सरकार भी जल्द ही इस मामले की जांच विजिलेंस को सौंप सकती है। जानकारी के अनुसार, प्रदेश में दो खरब से भी अधिक का पान-मसाले का कारोबार चल रहा है। इसकी बड़ी सप्लाई लखनऊ की तीन बड़ी पान-मसाला फैक्ट्रियों से की जा रही है।
यादव के संपर्क में थे राजधानी के कई बड़े व्यापारी
यादव सिंह की काली कमाई की जांच कर रही इनकम टैक्स की एसआईटी के अधिकारियों को अब तक जांच में यह जानकारी मिली है कि यादव के संपर्क में राजधानी के कई बड़े पान-मसाला व्यापारी भी थे। हालांकि, अभी तक की जांच में राजधानी की तीन बड़ी पान मसाला फैक्ट्रियों में उसके पैसे लगे होने की बात सामने आ रही है। इसमें एक फैक्ट्री नादरगंज क्षेत्र में हैं जिस पर पिछले वर्ष वाणिज्यकर विभाग की विशेष जांच इकाई (एसआईबी) ने छापा मारकर 200 करोड़ की बिक्री पर टैक्स चोरी का मामला पकड़ा था। लेकिन, उस समय यादव सिंह ने अपनी राजनीतिक पहुंच का दमखम दिखाते हुए तत्कालीन ज्वाइंट कमिश्नर पर दबाव बनाकर फर्म को क्लीन चिट दिला दी थी।
विजिलेंस जांच के मिल रहे संकेत
विभागीय सूत्रों की मानें तो वाणिज्यकर विभाग को केवल अपने टैक्स से मतलब होता है, इसलिए उक्त फैक्ट्रियों में किसका पैसा लगा है उस पर ध्यान नहीं दिया गया। हालांकि, आयकर विभाग जांच में इसका खुलासा होने के बाद राज्य सरकार की ओर से विजिलेंस जांच के संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में पान-मसाला कारोबार में यादव सिंह का पैसा लगने की सूचना के बाद वाणिज्यकर विभाग के अधिकारियों की सक्रियता बढ़ गई है।
आगे पढ़िए आयकर विभाग की टीम जुटा रही जानकारी…