लखनऊ. यश भारती सम्मान को लेकर विवादों का दौर भी शुरू हो गया था। सोमवार को पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा ने सम्मान की फाइनल लिस्ट को लेकर आपत्ति जताई। उन्होंने बताया कि उन्हें फोन पर यह सम्मान मिलने की सूचना दी गई थी। ऐन वक्त पर लिस्ट से नाम गायब था। वहीं, गोरखपुर के मार्शल आर्ट ट्रेनर अभिषेक यादव पर भी गलत जानकारी देकर यश भारती सम्मान की लिस्ट में शामिल होने के आरोप लगे हैं। इस आरोपों के समर्थन में गोरखपुर के ही मार्शल आर्ट ट्रेनर लालदेव यादव ने बाकायदा कागजात भी उपलब्ध कराए।
अभिषेक यादव का दावा है कि उन्होंने यूपी के 50 हजार पुलिसकर्मियों को कमांडों की ट्रेनिंग दी है। ऐसे में यहीं के कुछ खिलाड़ियों ने इस बात का विरोध किया है और उसे फर्जी बताया है। आरटीआई से मांगे गए जवाब में बताया गया कि ऐसे किसी व्यक्ति ने किसी पुलिसकर्मी को कमांडों की ट्रेनिंग नहीं दी है। हालांकि, सीएम अखिलेश यादव ने इस मामले में कोई जवाब देने से मना कर दिया।
खिलाड़ियों ने की जांच की मांग
इस मामले में गोरखपुर के ताइक्वांडो एसोसिएशन के उपाध्यक्ष और ट्रेनर लालदेव यादव समेत मार्शल आर्ट्स ट्रेनर धीरेंद्र प्रताप भी एकजुट हो गए हैं। उन्होंने बताया कि अभिषेक यादव ने मीडिया को गुमराह करते हुए गलत खबरें प्रकाशित करवाईं। खबरों की कटिंग के आधार पर पिपराइच की विधायक राजमती निषाद से अपने नाम की संस्तुति यश भारती सम्मान के लिए करवाई है। ऐसे में खिलाड़ियों ने उनके सभी प्रमाणपत्रों की जांच करवाकर सच को सामने लाने की मांग की है।
आरटीआई से हुआ खुला फर्जीवाड़ा
पुलिस प्रशिक्षण निदेशालय से आरटीआई के तहत मांगे गए जवाब में फर्जीवाड़े की बात सामने आई है। विभाग ने बताया कि अभिषेक यादव नाम के किसी व्यक्ति ने किसी पुलिसकर्मी को कोई कमांडों ट्रेनिंग नहीं दी है।
क्या है अभिषेक यादव का दावा
अभिषेक का दावा है कि वह अकीडो नाम के मार्शल आर्ट का मास्टर है। इसके लिए उसे बुल्गारिया भेजा गया था। यहां पर उसे बेस्ट फाइटर ऑफ एशिया का पुरस्कार भी मिला। इस उपलब्धि के बाद भारत सरकार की ओर से उसे 1.75 लाख रुपए का इनाम भी दिया गया। दावा है कि यूएस के प्रेसिडेंट
बराक ओबामा की तरफ से उन्हें लेटर ऑफ एप्रिसिएशन भी प्राप्त हुआ है।
आगे पढ़िए, अभिषेक ने कहा विरोधी करा रहे हैं दुष्प्रचार...