लखनऊ. राजधानी में दोस्तों द्वारा दोस्त की हत्या का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते दिनों अपने दोस्त के साथ घर से निकली गौरी और हर्ष की हत्या का राज सामने नहीं आया था कि दो फरवरी की रात अपने दोस्त के साथ पार्टी मनाने निकले युवक की हत्या कर शव नहर में फेंक दिया। पुलिस ने हत्यारे दोस्त को गिरफ्तार कर लिया है और हत्या में प्रयुक्त हथियार बरामद कर लिया है।
गाजीपुर में स्थित फातिमा अस्पताल के संचालन में अहम भूमिका निभाने वाले बलराम शुक्ला की हत्या अस्पताल के गाड़ी चालक उमेश तिवारी और अभिषेक सिंह ने की थी। दरअसल, बलराम ने कुछ ही समय में काफी तरक्की कर ली थी और हत्यारोपी बलराम की रईसी देख उससे ईर्ष्या करने लगे थे। वेतन न मिलने पर हत्यारोपी ने बलराम की हत्या करने का कुचक्र रच डाला था। पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक अभी भी फरार है।
क्या है मामला
एसएसपी यशस्वी यादव ने बताया कि इंदिरा नगर निवासी बलराम चंद्र शुक्ला फातिमा अस्पताल के संचालन में अहम भूमिका निभाता था। मरीजों से लेकर डॉक्टरों को अरेंज करने की जिम्मेदारी भी उसी की थी। उमेश तिवारी और अभिषेक सिंह अस्पताल में बतौर चालक के रूप में कार्यरत हैं।
दोनों का मासिक वेतन बलराम ही देता था। इधर पिछले कुछ दिनों से समय पर वेतन नहीं मिलने से उमेश और बलराम के बीच मनमुटाव चल रहा था। वेतन मांगने पर बलराम ने उमेश को सबके सामने धुतकार दिया था। यही बात उमेश को बुरी लग गई थी और उसने अभिषेक के साथ उमेश की हत्या करने का फैसला कर लिया। बलराम शराब पीने का आदी था। दो फरवरी की शाम उमेश ने खरगापुर में स्थित अभिषेक के प्लॉट पर पार्टी का इंतजाम कर रखा था।
आगे पढ़िए नशे में धुत बलराम की हत्या कैसे हुई...