मेरठ. बिजली विभाग तमाम दावे करे, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि अभी भी शहर में बड़े स्तर पर बिजली चोरी हो रही है। शहर के कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां लाइन लॉस 50 फीसदी तक है। इस समय प्रदेश में मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद बिजली चोरी रोकने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में बिजली विभाग के अलावा प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस विभाग को शामिल किया गया है। वहीं, जिस तरह से यह अभियान चल रहा है उसके चलते बड़ी सफलता अभी नहीं मिल रही है।
शुक्रवार को मुख्य सचिव और पावर कारपोरेशन के सीएमडी द्वारा वीडियो कांफ्रेसिंग के बाद मेरठ मंडलायुक्त ने अधिकारियों को बिजली चोरी रोकने के कड़े निर्देश दिए हैं। कमिश्नर ने पश्चिमांचल विद्युत निगम के एमडी विजय विश्वास पंत से सबसे बड़े पांच बकाएदारों की सूची उपलब्ध कराने के लिए कहा है।
मेरठ मंडल के आयुक्त भूपेंद्र सिंह ने मंडल के पुलिस अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा है कि वह मंडल में तार चोरी करने वाले गिरोह को चिन्हित करें और उनके विरूद्ध हर दशा में एनएसए के तहत प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें। तार चोरी करने वालों के विरूद्ध कड़ा अभियान चलाया जाए। बिजली चोरी की जो एफआईआर दर्ज की गई हैं उनकी विवेचना जल्द से जल्द पूरी कर प्रभावी कार्रवाई की जाए।
उपभोक्ताओं के पास 28 तक अवसर
अवैध कनेक्शन वैध कराने के लिए उपभोक्ताओं के पास केवल 28 फरवरी तक का समय है। यदि इस अवधि में उन्होंने अपने अवैध कनेक्शनों को वैध नहीं कराया तो बिजली चोरी पकड़े जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रबंध निदेशक पश्चिमांचल विद्युत निगम विजय विश्वास पंत को इस संबंध में कड़े निर्देश दिए गए हैं। जिन विद्युत वितरण खण्डों में कम राजस्व प्राप्त हुआ है उन्हें चिन्हित कर उनके विरूद्ध भी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। यदि बिजली चोरी कराने में किसी कर्मचारी की मिलीभगत मिली तो उसके खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई होगी।
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