मेरठ. क्रिकेट वर्ल्ड कप का आगाज 14 फरवरी से ऑस्ट्रेलिया में होने जा रहा है। भारत का पहला मैच 15 फरवरी को पाकिस्तान से होगा। इस मुकाबले में विजेता कोई भी टीम बने, लेकिन रन मेरठ के बैट से ही बरसेंगे। इसके पीछे कारण यही है कि वर्ल्ड कप में खेलने वाली टीमों के ज्यादातर खिलाड़ी मेरठ में बने बैटों से ही क्रिकेट की पिच पर अपने हाथ आजमाएंगे।
वर्ल्ड कप की तैयारी में मेरठ का स्पोर्ट्स उद्योग पिछले छह महीने से जुटा हुआ है। कारीगर अपने हाथों से एक से बढ़कर एक बैट बनाने में जुटे हैं। वहीं, दुकानदार वर्ल्ड कप के दौरान अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए दूसरे स्पोर्ट्स आइटम भी तैयार कर रहे हैं। बीडी महाजन एंड संस के डायरेक्टर राकेश कुमार महाजन और एसजी स्पोर्ट्स कंपनी के मार्केटिंग डायरेक्टर पारस आनंद के मुताबिक, वर्ल्ड कप से बाजार को काफी उम्मीदें हैं।
इन लकड़ियों से तैयार होता है क्रिकेट का बैट
क्रिकेट बैट दो प्रकार की लकड़ियों से तैयार किया जाता है। इनमें एक
कश्मीरी लकड़ी होती है, जबकि दूसरी इंग्लिश लकड़ी। इंग्लिश लकड़ी (विलो) इंग्लैंड से मंगाई जाती है। इससे बना बैट महंगा होता है। इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों में इन दोनों ही लकड़ियों से बने बैट से ही खिलाड़ी खेलते हैं। जिस लकड़ी से बल्ला बनाया जाता है उसका पहले वजन किया जाता है। उसके बाद ग्रेडिंग कर उसमें हैंडिल के लिए कटिंग की जाती है।
हैंडिल सेट करने के पहले मशीन से प्रेस की जाती है लकड़ी
इसके बाद लकड़ी को मशीन से प्रेस किया जाता है। मशीन में प्रेस करने के बाद उसमें हैंडिल फिट किया जाता है। इसके लिए सिंगापुर की लकड़ी 'केन' का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद ग्राइंड कर बैट में फिनिशिंग की जाती है। फिर इसकी पॉलिस की जाती है। उस पर स्टीकर और हैंडिल पर रबड़ आदि फिट की जाती है। बैट तैयार होने के बाद उसकी क्वालिटी चेक की जाती है। इसके बाद उसे बिकने के लिए बाजार में भेज दिया जाता है।
आगे पढ़िए, मेरठ में 500 से 25 हजार रुपए तक की रेंज के हैं बैट…