मुजफ्फरनगर. स्टूडेंट्स को राजनीती से दूर रखने के लिए दारुल उलूम देवबंद ने मदरसे के अंदर नेताओं और राजनीतिक लोगों के प्रवेश पर बैन लगा दिया है। कैंपस में कैमरा और मोबाइल से फोटो लेने पर पहले से ही बैन है। मेन गेट पर एक नोट भी लगाया हुआ है जिस पर लिखा गया है की मदरसा इमारतों का फोटो खीचना मना है।
मोहतमीम मुफ्ती अबुल काशिम नोमानी ने कहा कि तालीम पाने वाले स्टूडेंट्स को राजनीती से दूर रहना चाहिए। दारुल उलूम देवबंद के अपने कायदे कानून हैं। हम नहीं चाहते की किसी भी बात को लेकर हमें राजनीती से जोड़ा जाए।
ये है देवबंद का महत्व
बता दें कि दारुल उलूम देवबंद अपने फतवों के लिए जाना जाता है। दुनिया की दूसरे नंबर पर गिने जाने वाली इस इस्लामिक शिक्षण संस्था का अनछुआ पहलू ये भी है की इसकी बुनियाद के पीछे देश की आजादी लड़ाई है। जिस वक्त देश अंग्रेजों के चंगुल में था और हर हिंदुस्तानी इनके जुल्मों-सितम से परेशान हो चुके थे तब अरबी मदरसों पर अंग्रेजी शासको ने अपने पहरेदार बैठा दिए थे। 1866 में अंग्रेजों को ललकारते हुए उलेमाओं ने इस दिनी इदारे दारुल उलूम की नींव रखी और फिर एक आन्दोलन शुरू किया, जिसका नाम था रेशमी रुमाल आन्दोलन।