फोटोः दुर्लभ प्रजाति के कछुओं को गंगा में छोड़ते ग्रामीण।
मेरठ. प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी के गंगा सफाई मिशन में दुर्लभ प्रजाति के कछुए भी अपनी भूमिका निभाएंगे। मेरठ के किसानों और समाज सेवी संगठनों ने इसके लिए कमर कस ली है। 532 कछुओं को गंगा में गुरुवार को छोड़कर इस अभियान की शुरूआत की गई। इससे इन कछुओं को भी संरक्षित किया जा सकेगा। ये कछुए ग्रामीणों के सहयोग से संरक्षित किए गए थे। इन्हें हस्तिनापुर में मकदुमपुर गंगाघाट पर छोड़ा गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रयास से न केवल कछुओं को संरक्षित किया जाएगा, बल्कि कछुए गंगा को निर्मल करने में सहायक सिद्ध होंगे। कछुओं को संरक्षण के लिए विश्व प्रकृति निधि और वन विभाग के संयुक्त प्रयास से हस्तिनापुर की सामाजिक वानिकी प्रशिक्षण केंद्र की हैचरी में 18 दुर्लभ प्रजाति के अंडे संरक्षित किए गए थे। अंडों से बच्चे निकलने के बाद उन्हें एक कार्यक्रम के तहत गंगा में छोड़ा गया।
पहले भी गंगा में छोड़े गए थे 118 कछुए
दुर्लभ कछुओं को संरक्षण देने का कार्य एक साल पहले शुरू किया गया था। पहली बार 118 कछुओं को गंगा में छोड़ा गया था। विश्व प्रकृति निधि के निदेशक सुरेश बाबू ने बताया कि संगठन दो साल से ग्रामीणों को जागरूक कर रहा है। इस दौरान उनकी टीम गंगा से सटे 50 किमी के दायरे के 10 गांवों में गई, जहां उन्हें 53 घोंसले मिले, जिसमें कछुओं के अंडे थे। इन घोंसलों से 578 अंडे मिले, जिन्हें हैचरी में ले जाकर संरक्षित किया गया। पांच महीने तक हैचरी में रखने के बाद, जब उनमें से बच्चे निकल कर बाहर आ गए तब उन्हें गंगा में छोड़ा गया।
किसान भी इससे दिखे रोमांचित
संस्था से जुड़े हसगर नवाब ने बताया कि यह सब किसानों की मदद से ही संभव हो सका। किसानों को जागरूक करने के बाद उन्होंने अपने खेतों में मिले कछुओं के अंडों के बारे में बताया। इसके बाद उनके संरक्षण का कार्य शुरू किया गया। गंगा में किसानों के हाथों से ही कछुओं को छुड़वाया गया। इस अवसर पर किसान काफी रोमांचित दिखे। डीएफओ सुशांत शर्मा ने बताया कि यह कठिन कार्य था, लेकिन जागरूकता के माध्यम से इसे पूरा किया गया। यह अभियान आगे भी चलता रहेगा।
आगे देखिए, दुर्लभ प्रजाति के कछुओं की अन्य तस्वीरें...