फोटोः बाबा मखदूम शाह विलायत की दरगाह पर फरियाद करते लोग।
मेरठ. 800 साल पुरानी बाबा मखदूम शाह विलायत की इस दरगाह पर सुनवाई सात हाजिरी के बाद होती है। यहां शिकायत और मन्नत को लेकर अनोखी परंपरा है। फरियादी को एक कागज पर लिखकर बाबा के दरबार में अर्जी देनी होती है। उसे सात सप्ताह लगातार बाबा के दरबार में आना पड़ता है, फिर बाबा को लगता है कि फरियादी दिल से उनके पास आ रहा है। यहां आने वालों में नौकरी की चाहत रखने वालों की संख्या भी होती है।
बाबा मखदूम शाह विलायत की दरगाह पर आने वाले ऐसे फरियादियों की संख्या अधिक है, जो ऊपरी साए से अपने आपको पीड़ित बताते हैं। यहां आकर बाबा की मजार के सामने पहुंचते ही उन पर मौजूद ऊपरी साए का असर खुद-ब-खुद खत्म हो जाता है। कहते हैं, यहां आते ही प्रेतात्मा के राज खुद खुल जाते हैं, जिस व्यक्ति पर ऊपरी का असर होता है, वह व्यक्ति जब मजार पर आता है, तो खुद उस पर जिस साए का असर होता है, वह अपने बारे में बताने लगाता है।
दरगाह की देखरेख करने वाले आबिद हुसैन बताते हैं कि यहां सोमवार को पीड़ित आकर अपनी अर्जी लगाते हैं। इसका असर कुछ ऐसा है कि लोग खुद ही चले आते हैं। उसके बाद उन्हें सात सोमवार लगातार बाबा के दरबार में हाजिरी लगानी पड़ती है। मखदूम शाह विलायत के बारे में बताया गया है कि वह मक्का मदीना से आए थे। यहां मेरठ में आकर उन्होंने मोहल्ला जादियान में अपना बसेरा किया था। कब्रिस्तान में उनकी कब्र के पास ही उनके वालिद और वालिदा की कब्र भी बनी है।
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