मेरठ. नाजिम अपहरण के मामले में डीएसपी राम तीरथ और सब इंस्पेक्टर आशुतोष को प्रभारी जिला जज ने गुरुवार को अंतरिम जमातन याचिका खारिज करते हुए 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। अपहरण का यह मामला सरधना में वर्ष 2010 में दर्ज हुआ था। उस वक्त आरोपी राम तीरथ सरधना थाने के इंस्पेक्टर थे, जबकि आशुतोष वहां एसएसआई के रूप में तैनात थे। इस समय आशुतोष लखनऊ सतर्कता विभाग में डीएसपी के पद पर तैनात हैं, जबकि आशुतोष जीआरपी में तैनात हैं।
कोर्ट ने यह कार्रवाई नाजिम की मां सलमा की याचिका पर की है। इस मामले में पीड़ित पक्ष ने डीजीपी तक न्याय की गुहार लगाई थी, लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो सलमा के पति मेराजुद्दीन ने सुप्रीम कोर्ट का सहारा लिया था। मुख्य न्यायधीश की कोर्ट में मेराजुद्दीन ने खुद बहस की थी। तब उनका पक्ष सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनकी मदद के लिए दो वकील और हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज को मुहैया कराया था।
गुरुवार को दोनों आरोपियों की अंतरिम जमानत पर मेरठ जिला जज की कोर्ट में सुनवाई हुई, जहां प्रभारी जिला जज ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एसएसपी को तलब करते हुए 21 जनवरी तक नाजिम को हाईकोर्ट में पेश करने का आदेश दिया था। पुलिस नाजिम को कोर्ट में तो नहीं पेश कर पाई, लेकिन मुरादाबाद कोर्ट से राम तीरथ और आशुतोष ने तथ्य छुपाते हुए अंतरिम जमानत ले ली थी।
पांच साल बाद फरियादी को मिला न्याय
मोहल्ला भटियारी सराय निवासी मेराजुद्दीन ने सरधना पुलिस पर वर्ष 2010 में अपने 23 वर्षीय पुत्र नाजिम का अपहरण कर उसे गायब करने का आरोप लगाया था। पत्नी सलमा की ओर से इस प्रकरण में इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। कोर्ट ने इस मामले में आरोपी इंस्पेक्टर राम तीरथ और सब इंस्पेक्टर आशुतोष के खिलाफ कार्रवाई करने और अपहृत नाजिम की बरामदगी को तीन सप्ताह का समय दिया था।
मेराजुद्दीन ने कहा- पांच साल बाद मिला न्याय
मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ी तो एडिशनल सीजेएम कोर्ट-4 से दोनों पुलिस कर्मियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिए। इसी बीच इंस्पेक्टर राम तीरथ और एसएसआई आशुतोष ने हाईकोर्ट में अपनी जमानत अर्जी दाखिल की जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। गुरुवार को दोनों आरोपियों को जेल होने पर मेराजुद्दीन ने कहा कि उसे पांच साल बाद न्याय मिला है।
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