पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Rare Pics 1857 Revolt For Freedom In India

1857 के इस आग में झुलस गए थे अंग्रेज, देखिए दुर्लभ तस्वीरें...

8 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
भारत की आज़ादी और विभाजन को साठ साल पूरे हो चुके हैं। आज़ादी की लड़ाई की चिनगारी 1947 से भी नब्बे साल पहले 1857 में बैरकपुर में भ़ड़की जब सिपाही मंगल पांडे ने अंग्रेज़ अफ़सरों पर गोली चलाई.। मंगल पांडे को 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई लेकिन अगले दो तीन साल तक उत्तर भारत में अंग्रेज़ों की सत्ता का लगभग सफ़ाया हो गया। बैरकपुर में मंगल पांडे और उनके साथी ईसुरी पांडे को फाँसी पर लटकाए जाने के लगभग एक महीने बाद 10 मई 1857 को मेरठ छावनी में बग़ावत हो गई।
इस विद्रोह में मेरठ के कारीगरों, दुकानदारों, मज़दूरों और यहां तक कि वेश्याओं की भी भूमिका रही। मेरठ के कबाड़ी बाजार की वेश्याओं ने पूरे जी जान से इस विद्रोह में अंग्रेजों को सबक सिखाया था। मेरठ में कई अँगरेज़ अफ़सरों और उनके परिवार वालों को मारने के बाद विद्रोहियों ने उनके घरों को आग के हवाले कर दिया और रातों रात घोड़ों पर सवार होकर वो दिल्ली के लालक़िले की ओर कूच कर गए।
अवध की शान-ओ-शौकत और गंगो-जमनी संस्कृति का केंद्र लखनऊ इस आग से कैसे बच सकता था? अंग्रेज़ों ने अवध के नवाब को देश निकाला दे दिया था जिसके बाद चारों ओर विद्रोह जैसे फूट पड़ने को तैयार था. कुछ ही समय बाद विद्रोहियों ने चिनहट की लडाई में अंग्रेज़ फ़ौज को परास्त किया और लखनऊ में रेज़िडेंसी का घेरा डाल दिया। यहां अंग्रेज़ दाने-दाने को तरस गए और उनमें से कई वहीं मारे गए।
1857 के इस आग में झुलस गए थे अंग्रेज, देखिए दुर्लभ तस्वीरें...