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नफरत के बीच प्रेम का बीज बो रहा एलोवेरा, इस आइडिया ने बदली छुटमलपुर की जिंदगी

Dainik Bhaskar

Aug 01, 2015, 06:37 PM IST

धर्म, जाति और वर्ण भेद त्याग कर इन किसानों द्वारा एक दूसरे से प्रेरित होकर एलोवेरा की खेती की जा रही है।

एलोवेरा की खेती करने वाले किसान मतलूब। एलोवेरा की खेती करने वाले किसान मतलूब।
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सहारनपुर. एक ओर जहां पूरा प्रदेश इन दिनों सांप्रदायिक वारदातों की आंच से झुलस रहा है, वहीं दूसरी ओर यहां पर एक गांव ऐसा है, जहां के किसान एलोवेरा की खेती कर सांप्रदायिक एकता का पैगाम दे रहे हैं। यही नहीं, एलोवेरा की ये खेती दूसरे गांवों के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। जिले के कई गांवों में किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ इसकी खेती कर खुद को आर्थिक रूप से मजबूत बना रहे हैं।
छुटमलपुर ग्राम पंचायत से सटे गांव कमालपुर के रहने वाले मतलूब ने कुछ समय पहले पारंपरिक खेती को छोड़कर एलोवेरा की खेती करना शुरू की थी। अब ये दूसरे जाति और धर्म के लोगों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। मतलूब को देखकर छुटमलपुर क्षेत्र से ही जुड़े गांव कमालपुर के इस्लाम, गांव मथाना के तैयब, कमेशपुर के रामकुमार और फतेहपुर गांव के सैनी समाज के कई लोग मिल-जुलकर एलोवेरा की खेती कर रहे हैं।
वे सभी अलग-अलग धर्म से हैं, लेकि‍न इनके बीच प्रेम बढ़ाने में एलोवेरा महत्‍वपूर्ण भूमि‍का नि‍भा रहा है। हालात ऐसे हैं कि‍ इनका साथ केवल खेती तक सीमि‍त नहीं है बल्‍कि‍ वक्त पड़ने पर ये एक दूसरे के साथ खड़े भी नजर आते हैं।
दूसरे गांव के लोग भी ले रहे हैं प्रेरणा
छुटमलपुर क्षेत्र के किसानों द्वारा की जा रही एलोवेरा की खेती और लोगों का सांप्रदायिक प्रेम देखकर जिले के दूसरे ब्लॉक और तहसील क्षेत्रों के ग्रामीण भी प्रेरणा ले रहे हैं। अभी हाल में जिस रामपुर मनिहारान तहसील में सांप्रदायिक हिंसा हुई थी और एक युवक की जान चली गई थी, उसी तहसील क्षेत्र के गांव जंधेडा निवासी देवेंद्र ने भी एलोवेरा की खेती शुरू कर दी है। हालांकि, देवेंद्र ने बहुत कम जगह पर ही एलोवेरा को लगाया है। उसका कहना है कि उसने प्रयोग के तौर पर ये लगाया है। यदि इस साल अच्छा मुनाफा मिलता है तो वे दूसरी जगह भी इसकी खेती करेंगे।
खेती में नुकसान के बाद एलोवेरा उगाने का इरादा बनाया
एलोवेरा की खेती कर रहे गांव कमालपुर के किसान मतलूब अहमद का कहना है कि उन्हें पिछले छह साल में आमतौर पर की जाने वाली खेती में काफी नुकसान उठाना पड़ रहा था, जिससे उनके सामने कर्इ तरह की चुनौतियां खड़ी हो गई थीं। ऐसे में उन्हें एलोवेरा की खेती का सुझाव दिमाग में आया और उन्होंने अपने आडू के बाग में ही इसको उगाने का इरादा बना लिया।
आगे की स्‍लाइड्स में पढ़ि‍ए, एक बार पौधा लगाने पर सालों तक चलता है...

छुटमलपुर गांव में हो रही एलोवेरा की खेती। छुटमलपुर गांव में हो रही एलोवेरा की खेती।
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एक बार पौधा लगाने पर सालों तक चलता है 
मतलूब ने बताया कि एक बार इसका पौधा लगाने के बाद कई सालों तक चलता है और बाजार में इसकी पत्तियां अच्छे दामों में बिकती हैं। इसकी पत्तियों से निकलने वाले रस की भी उच्च स्तर पर मांग होने के चलते इसकी फसल का दोहरा फायदा मिलता है। इसके रस की बढ़ती मांग को देखते हुए ही मतलूब ने खेती करने के अलावा इसका रस निकालने का प्लांट भी लगा लिया है।
 
क्‍या कहते हैं बाकी किसान
एक अन्य किसान के अनुसार, एक बीघा भूमि में करीब दो फीट की दूरी पर 2500 पौधे लगाए जाते हैं। तैयार होने तक इन पर महज पांच से छह हजार का खर्च आता है। इसकी अच्छी और उन्नत पत्तियां हासिल करने के लिए साल भर में छह बार इसकी सिंचाई और निराई-गुड़ाई करना आवश्यक है।
 
इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसमें कोई बीमारी नहीं लगने के कारण रासायनिक खाद और कीटनाशक के प्रयोग की भी जरूरत नहीं पड़ती है। साथ ही इस पर ओलावृष्टि, पाला और बेमौसम बारिश का भी कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है, लेकिन अधिक सिंचाई के कारण इसमें पानी जमा होने से इसके पौधों की जड़ों में गलन की शिकायत जरूर पैदा हो जाती है। इसलिए सिंचाई करते समय इसका खास ख्याल रखना जरूरी है कि क्यारियों में पानी जमा नहीं होने पाए। मतलूब के अनुसार, एलोवेरा की फसल कम छायादार वृक्षों के बीच भी आसानी से उगाई जा सकती है।
 
कई तरह से हो रहा फायदा
एलोवेरा की खेती करने वाले किसान बताते हैं कि इसकी पत्तियों की कीमत करीब आठ रुपए प्रति किलो है। इस हिसाब से एक साल में प्रति बीघा 40 कुंटल पत्ती प्राप्त होती है, जिससे औसतन 15 हजार रुपए प्रति बीघा आय हो जाती है। इसके अलावा एलोवेरा के पौधे की जड़ से कई सालों तक ईख की तरह ही नए पौधे उगते रहते हैं, जिन्हें पौधों के रूप में बाजार में बेचा जाता है। मतलूब के अनुसार, एलोवेरा की पत्तियों की कई बड़ी कंपनियों में मांग लगातार बनी रहती है।
 
आगे की स्‍लाइड्स में पढ़ि‍ए, एलोवेरा के अन्‍य नाम... 
फाइल फोटो। फाइल फोटो।
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एलोवेरा को घृत कुमारी, क्वारगंदल या ग्वारपाठा के नाम से भी जाना जाता है। ये एक औषधीय पौधे के रूप में विख्यात है, जिसका उल्लेख आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है। एलोवेरा के अर्क का प्रयोग बड़े स्तर पर कई सौंदर्य प्रसाधनों में भी किया जाता है। बवासीर, डायबिटीज, गर्भाशय के रोग, पेट की खराबी, जोड़ों का दर्द, त्वचा की खराबी, मुंहासे, रूखी त्वचा, सन बर्न, झुर्रियों, दाग-धब्बों, आंखों के काले घेरों, फटी एडियों के लिए ये लाभप्रद है। इसके अलावा एलोवेरा मधुमेह के इलाज में भी काफी उपयोगी है। इसका जूस पीने से शरीर की हर बीमारी दूर हो जाती है।  
 
एलोवेरा जूस पीने से होते हैं ये फायदे 
ये अंदर से खून की सफाई करता है। शरीर में भोजन और प्रदूषण की वजह से बहुत सारी गंदगी आ जाती है। तीन से चार चम्मच रस सुबह खाली पेट लेने से दिन-भर शरीर में चुस्ती व स्फूर्ति बनी रहती है। साथ ही ये शरीर के अंदर की सारी गंदगी को बाहर निकाल देता है। 
 
हीमोग्‍लोबिन की कमी को पूरा करता है 
एलोवेरा का जूस ब्लड को प्यूरीफाई करता है। साथ ही हीमोग्लोबिन की कमी को भी पूरा करता है। ये शरीर में व्‍हाइट ब्लड सेल्स की संख्या को बढ़ाता है। इस जूस में खूब सारे एंटी ऑक्‍सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो बूढ़ा करने वाले फ्री रेडिकल्‍स को दूर करके इंसान को बुढ़ापे से बचाता है। जलने पर, कटने पर या अंदरूनी चोटों पर एलोवेरा लगाने घाव जल्दी भर जाता है। इसमें एंटी बैक्टीरिया और एंटी फंगल गुण पाए जाते हैं।
 
पाचन क्रिया सही करता है 
एलोवेरा जूस पीने से पेट के कई रोग दूर होते हैं। ये पाचन तंत्रिका को मजबूत बनाता है, जिससे वो पेट में जाने वाले आहारों से पौष्टिक तत्‍व को ग्रहण कर सके। इसके रोजाना उपयोग से अपच और कब्‍ज जैसी समस्‍या दूर होती है। पेट में पैदा होने वाले अल्‍सर को भी ये ठीक करता है। 
 
दिल की बीमारी और खून का दौरान ठीक रखता है 
ये शरीर में खून बढ़ाने के साथ ही खून का दौरान भी ठीक करता है। साथ ही शरीर में हाई ब्‍लडप्रेशर को सामान्‍य करता है, जिससे हार्ट अटैक की समस्‍या नहीं होती है।
 
आगे की स्‍लाइड्स में पढ़ि‍ए, एलोवेरा के बाकी लाभ... 
फाइल फोटो। फाइल फोटो।
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इसके रस में कई तरह के मिनरल्स, विटामिन्स, अमीनो एसिड जैसे बी12, बी6, बी2, बी1, फोलिक एसिड, नियासिन, जिंक और मैग्नीशियम पाए जाते हैं। इसी वजह से शरीर का हर रोग एलोवेरा दूर कर देता है। ये शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकाल कर शरीर की अंदर से सफाई करता है। इससे त्‍वचा में चमक आती है और दाग-धब्‍बे भी साफ हो जाते हैं।
 
इसके अलावा एक्‍जिमा, पिंपल्स और सिरोसिस की समस्‍या भी दूर हो जाती है। मुंह के रोगों में भी काफी आराम मिलता है। मसूड़ों से खून का आना भी बंद हो जाता है। साथ ही मुंह के अल्‍सर की बीमारी भी ठीक होती है। एलोवेरा का जूस पीने से मोटापा भी कंट्रोल होता है और एनर्जी बनी रहती है।
 
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एलोवेरा की खेती करने वाले किसान मतलूब।एलोवेरा की खेती करने वाले किसान मतलूब।
छुटमलपुर गांव में हो रही एलोवेरा की खेती।छुटमलपुर गांव में हो रही एलोवेरा की खेती।
फाइल फोटो।फाइल फोटो।
फाइल फोटो।फाइल फोटो।
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