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VIDEO: इसी सुरंग से सुरक्षित बाहर निकले थे पांडव, दुर्योधन ने रचा था षड़यंत्र

लाक्षागृह में बनी सुरंग यहां से कुछ दूर स्थित हिंडन नदी के किनारे पर निकलती है।

Dainik Bhaskar

May 17, 2015, 03:04 PM IST
this historical tunnel saved pandavas from lakshagraha
मेरठ. बरनावा स्थित लाक्षागृह का वर्णन महाभारत में आता है। लाक्षागृह में आग लगने के बाद पांडव जिस सुरंग से सुरक्षित बाहर निकले थे, वह आज भी बरनावा में मौजूद है। इस सुरंग को देखने के लिए दूर-दराज से लोग आते हैं। लाक्षागृह का निर्माण दुर्योधन ने पांडवों के खिलाफ एक षड्यंत्र के तहत कराया था।
लाक्षागृह का निर्माण लाख से कराया गया था और इसमें पांडवों को ठहराया गया था। दुर्योधन ने षडयंत्र रचा था कि जब पांडव यहां ठहरेंगे तो लाख से बने इस गृह में आग लगा दी जाएगी, जिससे सभी जलकर मर जाएंगे। हालांकि, पांडवों को इस साजिश के बारे में पता चल गया था और वह गुप्त सुरंग के जरिए सुरक्षित बचकर निकल गए थे।
हिंडन नदी के किनारे निकलती है यह सुरंग
जिला बागपत में स्थित बरनावा को पहले 'वारणावत' के नाम से जाना जाता था। इतिहासकारों के अनुसार, लाक्षागृह में बनी सुरंग यहां से कुछ दूर स्थित हिंडन नदी के किनारे पर निकलती है। वहां पर भी इस सुरंग के प्रमाण मौजूद हैं। हिंडन नदी एक बरसाती नदी है, जो जिला सहारनपुर की हिमालय पर्वत श्रृंखला से निकलती है।
आगे की स्लाइड्स में पढ़िए, टीले के रूप में दिखता है लाक्षागृह...
महानंद संस्कृत महाविद्यालय का आर्य द्वार। महानंद संस्कृत महाविद्यालय का आर्य द्वार।
लाक्षाग्रह के अवशेष आज यहां एक टीले के रूप में दिखाई देते हैं। हिंडन और कृष्णा नदी के संगम पर स्थित लाक्षागृह गांव के दक्षिण में करीब 100 फीट ऊंचा और करीब 30 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ एक टीला है। इसी टीले को लाक्षागृह का अवशेष समझा जाता है। इसके नीचे दो सुरंग बनी है। इस समय यहां गांधी धाम समिति, वैदिक अनुसंधान समिति और महानंद संस्कृत महाविद्यालय स्थापित है।
 
पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है स्मारक
 
लाक्षागृह का यह टीला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित स्मारकों में शामिल है। प्राचीन संस्मारक, पुरातात्विक स्थल और अवेशष अधिनियम 1958 (1958 के 24) के अंतर्गत इसे राष्ट्रीय महत्व का घोषित किया गया है। यदि कोई इस स्मारक को क्षति, नष्ट, विलय या फिर खतरे में डालने की कोशिश करता है तो उसे इस अपकृत्य के लिए दो साल की जेल या एक लाख रुपए जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है। साथ ही इस स्मारक से दो सौ मीटर का क्षेत्र विनियमित घोषित है। इस क्षेत्र में भवनों की मरम्मत, परिवर्तन या निर्माण की अनुमति सक्षम अधिकारी से लेनी होती है। 
 
आगे की स्लाइड्स में देखें अन्य संबंधित तस्वीरें...
सुरंग को देखते लोग। सुरंग को देखते लोग।
सुरंग तक आने-जाने के लिए बनी सीढ़ी। सुरंग तक आने-जाने के लिए बनी सीढ़ी।
लाक्षागृह टीले पर बना गांधी समिति धाम का पुराना द्वार। लाक्षागृह टीले पर बना गांधी समिति धाम का पुराना द्वार।
बरनावा स्थित संस्कृत महाविद्यालय। बरनावा स्थित संस्कृत महाविद्यालय।
सुरंग के बारे में लिखी जानकारी। सुरंग के बारे में लिखी जानकारी।
पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा लगाया गया सूचना का बोर्ड। पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा लगाया गया सूचना का बोर्ड।
लाक्षागृह के टीले पर स्थित एक पुराने निर्माण का अवशेष। लाक्षागृह के टीले पर स्थित एक पुराने निर्माण का अवशेष।
टीले पर स्थित एक पुराने निर्माण का अवशेष। टीले पर स्थित एक पुराने निर्माण का अवशेष।
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this historical tunnel saved pandavas from lakshagraha
महानंद संस्कृत महाविद्यालय का आर्य द्वार।महानंद संस्कृत महाविद्यालय का आर्य द्वार।
सुरंग को देखते लोग।सुरंग को देखते लोग।
सुरंग तक आने-जाने के लिए बनी सीढ़ी।सुरंग तक आने-जाने के लिए बनी सीढ़ी।
लाक्षागृह टीले पर बना गांधी समिति धाम का पुराना द्वार।लाक्षागृह टीले पर बना गांधी समिति धाम का पुराना द्वार।
बरनावा स्थित संस्कृत महाविद्यालय।बरनावा स्थित संस्कृत महाविद्यालय।
सुरंग के बारे में लिखी जानकारी।सुरंग के बारे में लिखी जानकारी।
पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा लगाया गया सूचना का बोर्ड।पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा लगाया गया सूचना का बोर्ड।
लाक्षागृह के टीले पर स्थित एक पुराने निर्माण का अवशेष।लाक्षागृह के टीले पर स्थित एक पुराने निर्माण का अवशेष।
टीले पर स्थित एक पुराने निर्माण का अवशेष।टीले पर स्थित एक पुराने निर्माण का अवशेष।
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