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आसाराम के शिविर में तोड़फोड़, आग लगाई गई, विरोध जारी

9 वर्ष पहले
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नई दिल्‍ली। महाकुंभ में इन दिनों तीन संतों पर सबसे अधिक विवाद है। ये हैं बाबा रामदेव, आसाराम बापू और राधे मां। महाकुंभ में चांदी के रथ पर सवार होकर कुंभनगरी पहुंचे बाबा रामदेव ए‍क बार‍ फिर से विवादों में फंस गए हैं। आसाराम के विवादित बयान के कारण उनके शिविर में भक्‍तों का गुस्‍सा फूट पड़ा और राधे मां के शाही स्‍नान में शामिल होने की खबर से अखाड़ों में गुस्‍सा है। सबसे पहले बात करते हैं बाबा रामदेव की।
बाबा रामदेव का चांदी के रथ पर यूं सवार होकर आना कई अखाड़ों को पसंद नहीं आ रहा है, जबकि रामदेव का कहना है कि मैं तो फकीर हूं। मुझे जैसा महान साधु-संन्‍यासियों ने कहा, मैंने किया। रामदेव ‘बड़ा उदासीन’ की पेशवाई में शामिल साधु-संन्यासियों के साथ कुंभ नगरी पहुंचे हैं।
इलाहाबाद के कुंभ मेले में निकाली गई बड़े पंचायती अखाड़े की पेशवाई में योग गुरु बाबा रामदेव न सिर्फ शामिल थे, बल्कि वह भी दूसरे महामंडलेश्वरों की तरह ही एक ख़ास रथ पर सजाए गए चांदी के हौदे पर सवार थे। करीब दस घंटे तक घूमी इस पेशवाई में बाबा रामदेव ने दूसरे महामंडलेश्वरों की तरह ही सोने का छत्र भी लगा रखा था और चारों तरफ लहरा रहे थे भारतीय तिरंगे।
रथ पर सजे चांदी के हौदे पर सवार होकर सोने का छत्र लगाये बाबा रामदेव के इस रूप को देखकर जहां उनके तमाम समर्थक रोमांचित हो उठे, वहीं दूसरे अखाड़ों के साधु-संतों ने रामदेव को इस तरह का दर्जा देने पर नाखुशी जाहिर की है। इलाहाबाद के कुंभ मेले में उदासीन सम्प्रदाय के बड़े पंचायती अखाड़े की पेशवाई में दूसरे साधु-संतों के साथ ही बाबा रामदेव भी पहुंचे। लेकिन बाबा यहां अखाड़े के दूसरे साधुओं के बीच पैदल चलने के बजाय ऐसे शाही रथ पर सवार होकर निकले, जिन पर अखाड़ों के पीठाधीश्वर और महामंडलेश्वरों की सवारी निकलती है।
बाबा एक बड़े से रथ पर रखे चांदी के हौदे पर विराजमान थे। चांदी के इसी सिंहासन पर सवार होकर बाबा अपने भक्तों पर फूल बरसाते हुए नज़र आए। अखाड़े का एक पहरेदार बाबा के सिर पर सोने का छत्र लगाए हुआ था। बाबा रामदेव बिलकुल उसी अंदाज़ में रथ पर सवार होकर दर्शन दे रहे थे, जिस अंदाज़ में अखाड़ों के महामंडलेश्वर आम तौर पर पेशवाई में निकलते हैं।
इस बारे में बाबा रामदेव ने कहा कि अखाड़े के पंचों ने उन्हें जैसा निर्देश दिया, उन्होंने वैसा ही किया। पर दूसरे अखाड़ों को रामदेव को इस तरह का दर्जा दिए जाने और उन्हें चांदी के हौदे पर सवार करना अच्छा नहीं लगा। जूना अखाड़े के पूर्व महामंडलेश्वर स्वामी पंचानंद गिरि का कहना है कि पेशवाई के रथों में चांदी के सिंहासन पर सिर्फ महामंडलेश्वरों या किसी वरिष्ठ संत को ही बिठाए जाने की परंपरा है और रामदेव कोई संत नहीं हैं। वह तो सिर्फ योग शिक्षक हैं। इनके मुताबिक़ बड़े पंचायती अखाड़े ने रामदेव को इस तरह शामिल कराकर एक गलत परंपरा की शुरुआत की है।