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सरकार की अफोर्डेबल हाउसिंग नीति से बिल्‍डरों का यूटर्न, ग्राहकों को परेशानी

7 वर्ष पहले
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फाइल फोटो: लखनऊ विकास प्राधिकरण।

लखनऊ.
सरकार ने मध्यम वर्ग के लोगों को मकान देने के लिए अफोर्डेबल हाउसिंग नीति बनाई है। इस नीति के जरिए आवासीय योजनाओं को शहरों सहित ग्रामीण इलाकों में भी संचालित किया जाएगा। इन योजनाओं को हाइटेक और इंटीग्रेटेड टाउनशिप परियोजना के अंतर्गत भी संचालित करने की बात कही गई है। इस योजना के तहत काम करने वाले बिल्‍डरों को सरकार की ओर से छूट भ्‍ाी दी जाएगी। इसके बाद भ्‍ाी अधिकांश बिल्‍डर इस योजना से किनारा कसते नजर आ रहे हैं। ऐसे में ग्राहक सबसे ज्‍यादा परेशान हो रहे हैं।

इस नीति का मुख्‍य उद्देश्‍य ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों को मकान मुहैया कराना है। ऐसे में लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि योजना अच्‍छी है लेकिन अधिकांश बिल्‍डर इसमें कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इस योजना के प्रति सरकार को कड़ा रुख अपनाना चाहिए ताकि बिल्‍डर एसही समय पर अपना काम पूरा करें।

बताते चलें, लखनऊ में चल रहे अधिकांश हाउसिंग प्रोजेक्‍ट अपनी तय समय सीमा से काफी पीछे हैं। ग्राहकों ने एडवांस बुकिंग के अलावा भी अतिरिक्‍त राशि का भुगतान बिल्‍डरों को कर दिया है। इसके बाद भी वे अभी तक किराए के मकानों पर रहने को मजबूर हैं। ऐसा सिर्फ इसलिए होता है क्‍योंकि बिल्‍डरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। इस बात से उनके हौसले दिनोंदिन बुलंद होते जा रहे हैं।

अफोर्डेबल हाउसिंग नीति

अफोर्डेबल हाउसिंग का तात्पर्य एक ऐसी योजना से है जिसमें कम से कम पांच एकड़ का क्षेत्रफल हो। इसका अधिकतम क्षेत्रफल 100 एकड़ का होना चाहिए। इसके कुल एरिया में कम से कम 60 फीसदी हिस्‍से पर बनने वाली आवासीय भवनों का कॉरपेट एरिया 75 वर्ग मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए। ऐसे भवनों की कीमत 15 से 30 लाख रुपए होती है।

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