फोटो: निठारी कांड का शिकार हुई ज्योति की तस्वीर के साथ पिता छब्बूलाल और मां सुनीता।
लखनऊ/नोएडा. निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की फांसी सुप्रीम कोर्ट ने 29 अक्टूबर तक के लिए टाल दी है। इसके साथ ही पीड़ित परिवारों का न्याय के लिए इंतजार और लंबा हो गया है। देश का सबसे चर्चित निठारी कांड दुनिया के सामने शायद कुछ महीने या साल नहीं आ पाता, यदि पायल रिक्शेवाले को बाहर इंतजार करने की बात कहकर पंढेर की कोठी के अंदर नहीं जाती।
dainikbhaskar.com को कोठी के सामने रहने वाले और निठारी कांड का शिकार हुई ज्योति की मां सुनीता ने बताया कि 7 मई 2006 में पायल नाम की लड़की लापता हो गई थी। वह मोनिंदर पंढेर की कोठी में रिक्शे से आई थी। उसने रिक्शेवाले को कोठी के बाहर रोका और वापस आकर पैसे देने की बात कही थी। काफी देर बाद जब वह वापस नहीं लौटी तो रिक्शेवाला पैसे लेने के लिए कोठी का गेट खटखटाया। इस पर उसे सुरेंद्र कोली ने बताया कि पायल काफी देर पहले जा चुकी है।
पायल के पिता ने दर्ज कराई एफआईआर
रिक्शेवाला का कहना था कि वह कोठी के सामने ही था, पायल बाहर नहीं निकली। यह बात पायल के घरवालों तक पहुंची। इसके बाद पायल के पिता नंदलाल ने एफआईआर लिखवाई कि उसकी बेटी कोठी से गायब हो गई। इसके बाद पुलिस पूरी तरह जांच में जुट गई। वहीं, नंदलाल लगातार पुलिस पर खोजबीन का दबाव बना रहे थे। इससे पहले निठारी से एक दर्जन से ज्यादा बच्चे गायब हो चुके थे।
पुलिस को जानकारी मिली कि पायल के पास एक
मोबाइल फोन था। वह अब स्विच ऑफ आता है। पुलिस ने उस नंबर की कॉल डिटेल निकलवाई। कॉल डिटेल में मुंबई से लेकर तमाम जगहों के नंबर पर थे। पुलिस ने उन नंबरों की जांच की, लेकिन हर जगह से पुलिस खाली हाथ लौट आई।
आगे पढ़िए, पायल के कॉल डिटेल में था पंढेर का नंबर...
EDITED BY:- सुजीत वर्मा
PHOTOS BY:- भूपिंदर सिंह