लखनऊ/नोएडा. निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की फांसी की सजा उम्रकैद में बदल दी गई है। कोली की दया याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार द्वारा की गई देरी को याचिका का आधार बनाया गया था। इस कांड के सह आरोपी मोनिंदर सिंह पंढेर भी जमानत पर बाहर है। वहीं, इस मामले में पीड़ित परिवार का आज भी न्याय से भरोसा नहीं टूटा है, उनका विश्वास है कि उन्हें एक दिन न्याय जरूर मिलेगा।
साल 2006 में देश को झकझोर देने वाली यह वारदात नोएडा के निठारी गांव के कोठी नंबर डी-5 में हुई थी। कोली के फांसी के फंदे के करीब पहुंचने पर dainikbhaskar.com की टीम निठारी गांव पहुंची। वहां भुक्तभोगी परिवारों ने कई चौंका देने वाली बातें बताईं। उनका कहना है कि असली नरपिशाच तो पंढेर था। उनके मुताबिक है कि पंढेर देखने में बेहद सौम्य और सरल स्वभाव का था। इसी वजह से उस पर किसी को शक नहीं हुआ।
उसके घर से बच्चों के कंकाल मिले थे। सीबीआई को जांच के दौरान मानव हड्डियों के हिस्से और 40 ऐसे पैकेट मिले थे, जिनमें मानव अंगों को भरकर नाले में फेंक दिया गया था। नोएडा सेक्टर-31 में पंढेर की कोठी डी-5 के सामने रहने वाले धोबी ने बताया कि उसने कई बार कोठी में एंबुलेंस और डॉक्टरों की टीम को आते और काली पन्नी में कुछ ले जाते देखा था। इस धोबी परिवार की बच्ची ज्योति (10) भी निठारी कांड की भेंट चढ़ गई थी। इस परिवार का कहना है कि पंढेर की कोठी में अक्सर नर्सों के साथ डॉक्टर आते थे। उनके साथ एंबुलेंस भी होती थी। नर्सें अपना मुंह ढंके रहती थीं।
ज्योति की मां सुनीता का कहना है कि मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी में दो डॉक्टरों और चार नर्सों का आना-जाना लगा रहता था। वे दो गाड़ियों से आते थे। उनके साथ एंबुलेंस भी होती थी। जब उन्होंने नौकर सुरेंद्र कोली से बार-बार डॉक्टरों के आने की वजह पूछी, तो उसने बताया कि घर में माताजी (पंढेर की मां) बीमार हैं। उनकी रूटीन चेकअप के लिए डॉक्टर आते हैं, जबकि कोठी में कभी कोई बूढ़ी औरत नहीं दिखती थी।
आगे पढ़िए, ज्योति के भाई अर्जुन ने सबसे पहले कोठी में देखे नरकंकाल और कटे हुए सिर...