फोटो: ग्रीन टेक्नोलॉजी मॉडल को दिखाते रमेश मौर्या।
वाराणसी. इंसान अपनी सोच को सही दिशा में लाने की पहल करे तो कई तकनीकें जन्म लेती हैं। ऐसी ही सार्थक सोच के साथ देवरिया के रहने वाले 10वीं पास ऑटो
मोबाइल इलेक्ट्रिशियन रमेश मौर्या ने नई तकनीक इजाद की है। उन्होंने उद्योगों को चलाने के लिए गैस आधारित बिजली प्लांट का छोटा मॉडल विकसित किया है।
वह बीएचयू आईआईटी के टीओसीआईसी (टीईप आउट रीईच कम क्लस्टर इनोवेशन सेंटर) में इनोवेटर मीट में पहुंचे। वहां भारत सरकार के डीएसआईआर (डिपार्टमेंट ऑफ साइंटिफिक रिसर्च) के प्रमुख साइंटिस्ट प्रताप सिंह इनोवेटरों की तकनीक को जांचने पहुंचे थे। रमेश मौर्या के पास पहुंचते ही उनके कदम ठहर गए। उन्होंने रमेश से पूरी तकनीक और इससे होने वाले फायदे को समझा।
क्या है ग्रीन टेक्नोलॉजी से फ्यूल गैस बनाने की तकनीक
रमेश मौर्या ने बताया कि सैकड़ों टन एग्रीकल्चर अवशेष खेतों में किसान जला देते हैं। सरसों की भूसी, धान की भूसी, फसल कटने के बाद निचले हिस्से को अक्सर जला दिया जाता है। इन अवशेषों को इकट्ठाकर उनकी ग्रीन टेक्नोलॉजी से फ्यूल गैस आसानी से निकाला जा सकता है।
इससे 70 फीसदी तक बिजली पैदा किया जा सकता है। गैस प्लांट से आसानी से बिजली इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि उनकी तकनीक में लोहे के चेंबर में जब अवशेष आएंगे तो पानी और मिथेन के मिश्रण से फ्यूल गैस तैयार होगा। इनसे निकलने वाले गैस को कहीं भी इकट्ठा किया जा सकता है।
आगे पढ़िए, ग्रीन टेक्नोलॉजी से फ्यूल गैस के फायदे...