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अंग्रेजी छोरा-बंगाली बाला की 32 साल पुरानी प्रेम कहानी, तस्वीरों की जुबानी

7 वर्ष पहले
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वाराणसी. इस रियल लव स्टोरी में हीरो क्रिस्टोफर यूके से 1971 में भारत भ्रमण के लिए आए थे। तब शायद उन्हें नहीं मालूम था कि वह भारत की कला-संस्कृति से इतना प्रभावित होंगे कि वापस अपने देश नहीं लौट पाएंगे। 1982 में काशी के एक स्कूल में पढ़ाने के दौरान उनकी मुलाकात एक बंगाली बाला गीता से हुई।
फिर क्या था, मानो इसी प्यार के लिए क्रिस्टोफर अपने परिवार से दूर काशी पहुंचे थे। तमाम संघर्षों के बाद क्रिस्टोफर और गीता ने प्यार की उस कहानी को अंजाम दिया, जो आज प्यार करने वालों के लिए एक मिसाल है।
जानिए कैसे और कहां शुरू हुई दिलचस्प लव स्टोरी
क्रिस्टोफर पहली बार वेल्स (युनाइटेड किंगडम) से 1971 में गोवा घूमने आए थे। कर्नाटक और कोच्चि से जल मार्ग द्वारा क्रिस्टोफर त्रिवेंद्रम घूमने जाते थे। मद्रास से कन्याकुमारी तक की यात्रा करते थे। शांति की तलाश में और गोस्वामी तुलसी दास जी की कृतियों को पढ़ने वह काशी पहुंचे। यहां वह एक स्कूल में टीचर के रूप में बच्चों को पढ़ाने लगे। काशी की प्राचीन संस्कृति से इतने प्रभावित हुए कि फिर कभी देश वापस नहीं लौटे।
क्रिस्टोफर बताते हैं कि देखते-देखते दस साल बीत गए। 1982 में स्कूल में एक महिला नौकरी की तलाश में आई। उसे नौकरी नहीं मिली, लेकिन पहली नजर में ही दोनों में प्यार हो गया। क्रिस्टोफर ने बताया कि उकी पत्नी ने गरीबी नजदीक से देखी है।
उन्हें ब्रेड और चाय पीकर रात में सोना पड़ता था। उनका नाम गीता था। वह बंगाली थी। हम दोनों में 1982 में इतनी नजदीकियां बढ़ी कि हिंदू रीति-रिवाज से शादी कर ली। आज दो बेटियां और एक बेटा है। सभी की शादी हो चुकी है और नाती-पोते भी हैं।
आगे जानिए इस लव स्टोरी से जुड़ी कुछ और खास बातें...