फोटो: एक मैच के दौरान विशेष भृगुवंशी (दाएं)।
वाराणसी. शनिवार को दक्षिण कोरिया के इंचियोन शहर में 17वें एशियन गेम्स का शानदार आगाज हुआ। पहले ही दिन भारतीय निशानेबाज जीतू राय ने 50 मीटर पिस्टल स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता। काशी के बास्केटबॉल खिलाड़ी विशेष भृगुवंशी भी एशियन गेम्स में हिस्सा ले रहे हैं। वह भारतीय बास्केटबॉल टीम में फॉरवर्ड और गार्ड की पोजिशन में खेलते हैं। ऐसे में उनके परिजन एशियन गेम्स में उनके बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद लगाए हुए हैं।
बताते चलें कि विशेष काशी के अर्दली बाजार में भुवनेश्वर नगर कॉलोनी में रहते हैं। साल 2000 में जब वह महज सात साल के थे, तब उनके बड़े भाई विभोर भृगुवंशी उन्हें बास्केटबॉल कोर्ट लेकर गए थे। इसके बाद विशेष ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 22 साल की उम्र में इन्होंने 23 से ज्यादा इंटरनेशनल मैच खेलें। साथ ही अपनी कप्तानी में भारत के लिए दर्जनों मेडल भी जीतें।
विभोर हैं विशेष के पहले कोच
विशेष के पहले कोच उनके बड़े भाई विभोर भृगुवंशी हैं। अपने छोटे भाई के बारे में विभोर बताते हैं कि बचपन से ही विशेष काफी शरारती थे। किसी काम में उनका मन नहीं लगता था। उन्हें किसी तरह बास्केटबॉल खेलने के लिए राजी किया गया। शुरुआती दौर में उनका मन इस खेल में भी नहीं लगा। काफी कोशिशों के बाद वह साल 2006 में यूपी की जूनियर टीम में सेलेक्ट हुए। यहां से उनका सफर शुरू हुआ, जो बदस्तूर जारी है। इसके बाद वह सीधे भारतीय टीम में शामिल हो गए। साल 2008 में उन्हें एशिया का 'मोस्ट वैलूएवर प्लेयर' अवॉर्ड मिला।
क्या कहते हैं पिता
विशेष के पिता प्रमोद कुमार सिंह यूपी कॉलेज में प्रोफेसर हैं। उनका कहना है कि उनका छोटा बेटा काफी जुनूनी है। शुरू में उन्हें लगता था कि उसका पढ़ने-लिखने में मन नहीं है। दिनभर बॉल लेकर पटकता रहता है। हालांकि, धीरे-धीरे उन्हें बेटे की काबिलियत पता चली। सुबह होते ही वह ग्राउंड पहुंच जाता था और घंटों प्रैक्टिस करता था। वहीं, मां वीना रानी सिंह ने बताया कि बेटा देश के लिए खेलना चाहता था। उसने अपना सपना साकार किया है। वह चाहती हैं कि उनका बेटा एशियन गेम्स में बेहतर प्रदर्शन की बदौलत देश के लिए गोल्ड मेडल जीतकर लौटे।
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