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केएनपीजी कॉलेज की लाइब्रेरी में करोड़ों की कि‍ताब चट कर रहे दीमक

7 वर्ष पहले
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फोटो: दीमक द्वारा चट की गईं लाइब्रेरी में रखी कि‍ताबें।
वाराणसी/भदोही. कहते हैं किताबें ज्ञान प्राप्त करने का सबसे सुगम जरिया होती है, इसीलिए कॉलेजों में लाइब्रेरी बनाई जाती है। हालांकि‍, आजकल देख-रेख के अभाव में ज्ञान देने वाली किताबें दीमक का निवाला बन रही हैं। ताजा मामला भदोही के काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की है। यहां की लाइब्रेरी एक साल से ज्यादा समय से बंद है और इसमें रखे करोड़ों रुपए की कीमत की लाखों किताबों को दीमक चट कर रहे हैं। ऐसे में यहां छात्र-छात्राओं को लाइब्रेरी शुल्‍क देने के बावजूद किताबों का दर्शन तक नहीं मिलता है।
बताते चलें कि‍ भदोही जिले में 1951 में बेहतर शिक्षा के लिए केएनपीजी कॉलेज का निर्माण कराया गया था, जहां तमाम सुवि‍धाएं उपलब्‍ध कराई गई थीं। फि‍लहाल कॉलेज में 10 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। यहां स्नातक और स्नातकोत्तर कक्षाओं में 20-20 विषयों में शिक्षण की सुविधाएं उपलब्‍ध हैं। 20 विषयों में शोध के आलावा बीएड का पाठ्यक्रम भी शामि‍ल है।
करोड़ों की किताबें चाट रहे हैं दीपक
जिले के इकलौते इस पीजी कॉलेज में अध्ययन करने के लिए एक विशाल लाइब्रेरी की स्थापना कराई गई है। इसमें एक लाख से अधि‍क किताबें उपलब्ध हैं। कॉलेज में इन तमाम खूबियों के बीच छात्रों को तब बड़ा झटका लगा जब एक साल पहले कॉलेज की लाइब्रेरी को बंद कर उस पर ताला लटका दिया गया। एक साल से ज्यादा समय हो गया, लेकिन आज तक छात्रों को लाइब्रेरी का लाभ नहीं मिल सका है। दूसरी ओर, किताबों को दीमक खा रहे हैं।
शुल्‍क देने के बावजूद नहीं मि‍ल रही लाइब्रेरी की सुवि‍धा
बताते चलें कि‍ कॉलेज में सालाना छात्र-छात्राओं से लाइब्रेरी शुल्क लिया जाता है, लेकिन उन्‍हें पढ़ने के लिए किताबें नहीं मिलती हैं। छात्र-छात्राओं का आरोप है कि‍ लाइब्रेरी नहीं खुलने से उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रा आकांशा ने बताया कि‍ कई किताबें बाजारों में नहीं मि‍लती हैं, ऐसे में कॉलेज की लाइब्रेरी ही सहारा होती है। हालांकि‍, यहां लाइब्रेरी में रखी किताबें छात्र-छात्राओं के पढ़ने की बजाए दीमक की नि‍वाला बन गई हैं।
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