वाराणसी. ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में पूरी दुनिया में प्रकृति को बचाने के लिए हर संभव पहल चल रही है। इसके लिए करोड़ों अरबों रुपए की तमाम योजनाएं भी चल रही है। इसी कड़ी में बीएचयू के एक छात्र ने प्रकृति को बचाने का संदेश देने का माध्यम अपनी कला को बनाया है। इसमें बाढ़ में फंसे व्यक्ति अपनी भूख से कैसे लड़ता है और नृत्य कला में डूबे व्यक्ति के चेहरे के भाव को मूर्ति में दिखाने की कोशिश की गई है।
दृश्य कला संकाय के मूर्ति कला विभाग के छात्र विरेंद्र कुमार ने ऐसी कई मूर्तियां बनाई है। इन्हें न सिर्फ शो पीस के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है, बल्कि उसमें ग्रीन प्लांट भी लगाया जा सकता है। विरेंद्र की मूर्ति की
खूबसूरती और उसके प्राकृतिक जुड़ाव के कारण इसकी कीमत एक लाख रुपए लगाई गई है।
इन मूर्तियों की खासियत
प्रकृति जैसी संवेदनशील थीम के साथ वीरेंद्र ने कई महीनों की मेहनत के बाद इन मूर्तियों को आकार दिया है। करीब तीन फीट की इस मूर्ति को आप सजावट के तौर पर रख सकते हैं। लेकिन, इसमें प्लांट लगाने के साथ ही इन मूर्तियों की खूबसूरती और बढ़ जाएगी। इससे एक तरफ तो खूबसूरती बढ़ेगी और दूसरी तरफ ये मूर्ति देखने वाले को प्रकृति को बचाने का संदेश भी देगी।
बाढ़ से बचाने की जद्दोजहद
विरेंद्र ने बताया कि बाढ़ से पीड़ित व्यक्ति कैसे अपने भूख को नजरअंदाज करके पहले अपने जीवन को बचाने की कोशिश करता है। उस व्यक्ति के चेहरे के भाव को मूर्ति में दिखाने की कोशिश की गई है। ऐसे ही जब कोई नृत्य कला में डूब जाता है तो उसे कुछ भी दिखाई और सुनाई नहीं देता है। मूर्ति के आंखों पर पट्टी बांध कर इस भाव को प्रकट किया गया है।
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