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21 साल से MLA है 12 Yr. से जेल में बंद ये बहुबली, पढ़ें लाइफ से जुड़ी ये बातें

3 वर्ष पहले
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वाराणसी. 8 साल पुराने चर्चित मन्ना सिंह मर्डर केस में विधायक मुख्तार को एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट से बाइज्जत बरी कर दिया गया है। बता दें, 12 साल से जेल में बंद मुख्तार को मायावती ने बीएसपी से टि‍कट दिया था। dainikbhaskar.com आपको इस बाहुबली की लाइफ से जुड़ी बातें बता रहा है।
 
जब क्राइम की दुनिया में पहली बार सामने आया मुख्तार का नाम...
 
- 1988 में मुख्तार का नाम  क्राइम की दुनि‍या में पहली बार आया। मंडी परिषद की ठेकेदारी को लेकर लोकल ठेकेदार सच्चिदानंद राय की हत्या के मामले में मुख्‍तार का नाम सामने आया। इसी दौरान त्रिभुवन सिंह के कॉन्स्टेबल भाई राजेंद्र सिंह की हत्या बनारस में कर दी गई। इसमें भी मुख्तार का ही नाम सामने आया।
 
माफि‍या डॉन ब्रजेश सिंह से हुई दुश्‍मनी
- 1990 में गाजीपुर जिले के तमाम सरकारी ठेकों पर ब्रजेश सिंह गैंग ने कब्जा शुरू कर दिया। अपने काम को बनाए रखने के लिए मुख्तार अंसारी के गिरोह से उनका सामना हुआ। यहीं से ब्रजेश सिंह के साथ इनकी दुश्मनी शुरू हो गई।
- 1991 में चंदौली में मुख्तार पुलिस की पकड़ में आए, लेकिन आरोप है कि रास्ते में दो पुलिस वालों को गोली मारकर वो फरार हो गए।
- इसके बाद सरकारी ठेके, शराब के ठेके, कोयला के काले कारोबार को बाहर रहकर हैंडल करना शुरू किया।
- 1996 में एएसपी उदय शंकर पर जानलेवा हमले में उनका नाम एक बार फिर सुर्खियों में आया।
- 1996 में मुख्तार पहली बार एमएलए बने। उन्होंने ब्रजेश सिंह की सत्ता को हिलाना शुरू कर दिया।
- 1997 में पूर्वांचल के सबसे बड़े कोयला व्यवसायी रुंगटा के अपहरण के बाद उनका नाम क्राइम की दुनिया में देश में छा गया।
- आरोप है कि 2002 में ब्रजेश सिंह ने मुख्तार अंसारी के काफिले पर हमला कराया। इसमें मुख्तार के तीन लोग मारे गए। ब्रजेश सिंह घायल हो गए। इसके बाद मुख्तार अंसारी पूर्वांचल में अकेले गैंग लीडर बनकर उभरे।
 
2005 से हैं जेल में बंद
- अक्टूबर 2005 में मऊ जिले में हिंसा भड़की। इसके बाद उन पर कई आरोप लगे, हालांकि वे सभी खारिज हो गए।
- उसी दौरान उन्होंने गाजीपुर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया, तभी से वे जेल में बंद हैं।
- इसी दौरान कृष्णानंद राय से मुख्‍तार के भाई अफजल अंसारी चुनाव हार गए। मुख्तार पर आरोप है कि‍ उन्‍होंने शार्प शूटर मुन्ना बजरंगी और अतिकुर्रह्मान उर्फ बाबू की मदद से 5 साथियों सहि‍त कृष्णानंद राय की हत्या करवा दी।
- 2010 में अंसारी पर राम सिंह मौर्य की हत्या का आरोप लगा। मौर्य, मन्नत सिंह नामक एक स्थानीय ठेकेदार की हत्या का गवाह था। मुख्तार और उनके दोनों भाइयों को 2010 में बसपा ने निष्कासित कर दिया।

क्‍या था कृष्णानंद राय मर्डर केस?
- साल 2005 में मुख्तार अंसारी जेल में बंद थे। इसी दौरान बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय को उनके 5 साथियों सहि‍त सरेआम गोलीमार हत्या कर दी गई।
- हमलावरों ने 6 एके-47 राइफलों से 400 से ज्यादा गोलियां चलाई थी। मारे गए लोगों के शरीर से 67 गोलियां बरामद की गई थी।
- इस हमले का एक महत्वपूर्ण गवाह शशिकांत राय 2006 में रहस्यमई परिस्थितियों में मृत पाया गया था। उसने कृष्णानंद राय के काफिले पर हमला करने वालों में से अंसारी और बजरंगी के निशानेबाजों अंगद राय और गोरा राय को पहचान लिया था।
- कृष्णानंद राय की हत्या के बाद मुख्तार अंसारी का दुश्मन ब्रजेश सिंह गाजीपुर-मऊ क्षेत्र से भाग निकला। 2008 में उसे उड़ीसा से गिरफ्तार किया गया।
- 2008 में अंसारी को हत्या के एक मामले में एक गवाह धर्मेंद्र सिंह पर हमले का आरोपी बनाया गया था।
- 2012 में महाराष्ट्र सरकार ने मुख्तार पर मकोका लगाया। उनके खि‍लाफ हत्या, अपहरण, फिरौती जैसे कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।
 
मुख्तार की हत्या के लिए दी गई थी 6 करोड़ की सुपारी

- मुख्तार अंसारी की हत्या के लिए ब्रजेश सिंह ने लंबू शर्मा को 6 करोड़ रुपए की सुपारी दी गई थी। इसका खुलासा साल 2014 में लंबू शर्मा की गिरफ्तारी के बाद हुआ था। इसके बाद से जेल में अंसारी की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।

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