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आम लोगों के लिए खुलेगा चुनार किला, पर्यटन को बढ़ावा देगी यूपी सरकार

6 वर्ष पहले
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मीरजापुर. तिलस्मी चुनार का किला हजारों साल बाद अब आम जनता के लिए अब खोला जाएगा। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार इस किले का सौंदर्यीकरण कराने की तैयारी कर रही है। आजादी के बाद किले में पीएसी प्रशिक्षण केंद्र बना दिया गया था। इस किले के चारों ओर ऊंची-ऊंची दीवारें हैं। यहां से सूर्यास्त का नजारा देखना बहुत ही मनोहारी प्रतीत होता है। मौजूदा वक्त में इस किले के ज्‍यादातार हिस्‍सों पर पीएसी प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जाने से आम जनता का किले के कई हिस्सों में जाने पर बैन है।
कैसे हुआ किले का निर्माण
जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर पूर्व में गंगा किनारे करीब ढाई हजार साल पहले बने चुनार किले का निर्माण 56 ई.पू्. उज्जैन के तत्कालीन राजा विक्रमादित्य ने अपने भाई राजा भर्तहरी के लिए करवाया था। राजा भर्तहरी की समाधि भी किले में मौजूद है। भक्त समाधि पर मत्था टेककर दर्शन पूजन करते हैं। बाबा के मंदिर में तेल और तस्वीर चढ़ाने की परंपरा है। किले के निर्माण से लेकर अब तक 17 राजाओं के कब्जे में चुनार किला रहा है।
किले पर हुआ कब्‍जा
गंगा तट पर यह जगह बड़ी खूबसूरत और मनोरम है। एक शिलापत्र पर उल्लेख मिलता है कि उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य के बाद इस किले पर 1141 से 1191 ई. तक पृथ्वीराज चौहान, 1198 में शहाबुद्दीन गौरी, 1333 से स्वामीराज, 1445 से जौनपुर के मुहम्मदशाह शर्की, 1512 से सिकंदर शाह लोदी, 1529 से बाबर, 1530 से शेरशाह सूरी और 1536 से हुमायूं आदि शासकों का कब्जा रहा। शेरशाह सूरी से हुए युद्ध में हुमायूं ने इसी किले में शरण ली थी। इस प्रसिद्ध किले की मरम्मत शेरशाह सूरी ने करवाई थी।
चुनार का किला जीतना शान का हिस्‍सा
कहा जाता है कि एक बार इस किले पर अकबर ने कब्‍जा कर लिया था। उस समय यह किला अवध के नवाबों के अधीन था। इसके बाद ईस्ट इंडिया कंपनी के पहले गवर्नर वारेन हेस्टिंग्ज ने इसे अपना आशियाना बनाया था। 1772 में मुगलों से ईस्ट इंडिया कंपनी ने यह किला जीता। इसके बाद से किले पर अंग्रेजों का कब्जा हो गया। गंगा किनारे बने इस किले को हमेशा ही रणनीतिक तौर पर अहम माना गया। देश में शासन करने वाले हर राजाओं के लिए चुनार का किला जीतना शान का हिस्सा था।
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