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राजधानी के बहुचर्च‍ित माज हत्‍याकांड का फरार मुख्‍य आरोपी गिरफ्तार

7 वर्ष पहले
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तस्‍वीर में: पकड़ा गया आरोपी अजीत यादव उर्फ बंटी।
वाराणसी. लखनऊ के बहुचर्चित माज अहमद हत्‍याकांड का फरार मुख्‍य आरोपी अजीत यादव को गाजीपुर के मेहगांव में दबोच लिया गया। वह किसी घटना का अंजाम देने जा रहा था। उसके पास से भारी मात्रा में असलहे और नगद रुपए बरामद हुए हैं।

बताते चलें कि जेल में निरुद्ध अजीत यादव जनवरी 2014 में बलिया से पेशी से वापस आते वक्‍त ट्रेन से कूदकर फरार हो गया था। इसका मुकदमा गाजीपुर जीआरपी थाने में दर्ज हुआ था। फरार होने के बाद से अजीत ने अपने जुर्म का जाल और बढ़ाना शुरू किया और गाजीपुर से लेकर गोरखपुर तक के व्यवसाइयों के लिए डर का पर्याय बन गया। डॉक्‍टरों, व्यवसाइयों और जनप्रतिनिधियों को रंगदारी के लिए फोन आने लगे। नहीं देने पर जान से मारने की धमकी भी दी जाने लगी।

क्या था माज हत्याकांड

पिछले साल 29 मई को लखनऊ के फरीदीनगर में मासूम छात्र माज अहमद की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। यह हत्‍याकांड उस वक्त हाईप्रोफोइल हो गया जब नौ जून को खुलासा हुआ कि साजिश करने वाला कोई अपराधी नहीं, बल्कि एंटी ह्यूमन ट्रेफिकिंग यूनिट का प्रभारी इंस्पेक्टर संजय राय है। पुलिस इस हत्याकांड में सस्‍पेंड इंस्पेक्टर संजय राय के नौकर राम बाबू उर्फ छोटू, राहुल राय, अजीत राय, सुनील उर्फ पहलवान, अजीत यादव उर्फ बंटी यादव और संजय के भाई अजय राय को गिरफ्तार कर चुकी है। 15 जुलाई को संजय राय ने कोर्ट में सरंडर किया और तब से जेल में है।

फरारी के बाद जुर्म की दुनिया में पैर पसारा

अजीत यादव फरारी के बाद से जुर्म की दुनिया में साम्राज्य बनाने में जुट गया था। पूर्वांचल में लोगों से रंगदारी की मांग की जाने लगी। इस मामले में गोरखपुर के प्रसिद्ध बाल रोग चिकित्सक और चारगांव के ब्लाक प्रमुख से एक करोड़ की मांग खासी सुर्खियों में रहे। इन मामलों में दोनों पीड़ितों ने प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। इसके अलावा कई ऐसे भी मामले आए, जिनमें लोग इस अपराधी को पैसा देकर अपना पिंड छुड़ाना ही ज्यादा बेहतर समझे।

आगे पढ़िए साल 2003 से जुर्म की दुनिया में चल रहा था अजीत यादव का सिक्‍का...