वाराणसी/चंदौली. 23 जनवरी को रामनगर में अखिलेश यादव की रैली होनी है। साथ ही चंदौली जिला मुख्यालय (जासूरी गांव) के एक भवन का शिलान्याश भी करना है, लेकिन इस भवन के में चल रहे निर्माण कार्य को किसानों ने रोक दिया है।
किसानों का कहना है कि उनकी ज़मीन को जिला मुख्यालय के निर्माण के लिए अधिगृहत तो जरुर कर लिया गया है, लेकिन उन्हें ज़मीन का पूरा मुआवजा अभी तक नहीं मिला। किसान नए दर के हिसाब से मुआवज़ा देने की मांग कर रहे है। उनका कहना है कि जब तक भूमि अधिग्रहण बिल 2013 के अनुसार निर्धारित रेट से मुआवजा नहीं मिल जाता तब तक निर्माण कार्य को नहीं होने देंगे।
डोमन गोंड सपा के सेक्टर प्रभारी और किसान ने बताया कि वर्ष 1997 में चंदौली को वाराणसी से अलग कर नया जिला बनाया गया था, लेकिन जिला मुख्यालय निर्माण का मुद्दा अभी तक ठंढे बस्ते में पड़ा हुआ था। 17 सालों के इंतजार के बाद 23 जनवरी को देश बनाओ, देश बचाओ रैली में भाग लेने आ रहे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा जिला मुख्यालय का शिलान्याश किए जाने की घोषणा के बाद यहां युद्ध स्तर पर कार्य चल रहा था। सैकड़ों की संख्या में लगे मजदूर रात दिन काम कर 23 तारिख से पहले इसे शिलान्यास योग्य बनाने में लगे हुए थे। इसी बीच किसान अपनी ज़िद पर अड़ गए हैं और मुख्यालय निर्माण कार्य रोक दिया है।
किसानों के इस विरोध की सूचना मिलते ही जिला प्रसाशन में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंचे प्रभारी जिलाधिकारी ने आक्रोशित किसानों को समझा बुझाकर शांत कराया। उन्होंने शिलान्यास से पूर्व किसानों की मांगो पर गंभीरता से विचार करने और इसका समाधान करने का आश्वासन दिया है। किसान शशिकांत ने बताया मुआवजे की कुछ रकम दी गई है, जो बहुत कम है।
क्या कहते हैं अधिकारी
अधिग्रहण के चलते जो किसान भूमिहीन हो चुके हैं, उनके पुनर्वास की भी व्यवस्था की जाए। किसानों ने कहा कि पुराने अधिनियम के अनुसार उन्हें नौ लाख रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा दिया गया है। नए सर्किल रेट पचास लाख रुपया प्रति हेक्टेयर हो चुका है।
प्रशासन ने कहा था कि किसानों को चार गुना मुआवजा देंगे जबकि ऐसा नहीं किया गया है। यदि मांगे पूरी नहीं की गईं तो किसान अपनी भूमि पर प्रशासन का कब्जा नहीं होने देंगे। प्रभारी जिलाधिकारी तिलकधारी यादव ने बताया कि किसानों को समझाया गया है। उनकी जायज मांगों को जरुर माना जाएगा।
आगे देखें प्रदर्शन कर रहे किसानों की तस्वीरें...