वाराणसी. आज भले ही हम विज्ञान के जरिए मंगल पर पहुंच गए हों, लेकिन कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिस पर सहज ही यकीन नहीं होता। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग आज भी ऊपरी हवा यानि भूत प्रेत पर विश्वास करते हैं। कैंट क्षेत्र के सद्भावना पार्क में स्थित बहादुर शहीद मज़ार के पास इस्लामिक कैलेंडर के रबि-अल-अव्वल के महीने में उर्स होता है। यहां भूतों से छुटकारा पाने के लिए नाचती झूमती औरतें, पुरुष और बुजुर्ग दिन भर दिखाई देते हैं।
लोगों का आत्मविश्वास ही आधुनिक युग में भी उन्हें यहां ले आता है। पूर्वांचल ही नहीं बल्कि बिहार, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, मुंबई और विदेशों तक से लोग यहां भूत भगाने पहुंचते हैं। उर्स के अलावा आम दिनों में भी यहां काफी भीड़ होती है। भूत, प्रेत चाहे कितना भी खतरनाक क्यों न हो, वह भी यहां पनाह मांगता है। मजार पर रहने बाबा का भी यही कहना है कि साया (आत्मा) कितना भी शक्तिशाली हो गुस्ल का पानी पड़ते ही उसे नर्क नजर आने लगती है।
क्या कहते हैं लोग
बहादुर शहीद की यह मज़ार 'भूतों के डॉक्टर' का काम करती है। साथ ही यहां आने वालों की माने तो यहां आने से रोग तो दूर होते ही हैं साथ ही घर में बरकत भी होती है। यहां विगत 35 वर्षों से आ रहे बुज़ुर्ग शिव प्रसाद की माने तो बाबा के अंदर बहुत शक्ति है। वह भूत प्रेत सब खत्म कर देते हैं।
बिहार के पटना से आए हरखू ने बताया पत्नी कई सालों से अस्वस्थ्य थी। यहां आने के बाद अब वह पूरी तरह ठीक हो गई है। शीबा ने बताया वह हरियाणा से आई है, पति की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी, काफी इलाज भी करवाया था। वह चार साल पहले मजार पर दुआ करने आई थी, अब वह धीरे-धीरे ठीक हो रहे हैं। वह अपना बिजनेस भी अच्छे से चला रहे हैं।
क्या कहते हैं यहां के मौलवी
मज़ार के सज्जादानशीन समीरुल्लाह खां ने बड़ी सहजता से इसे गंगा जमुनी तहज़ीब का नायाब उदाहरण बताया। उन्होंने इस दरगाह के बारे में बताया कि जो लोग नजिस और नापाक होते हैं और हराम मौत मारे जाते हैं, उनकी रूह भटकती रहती है। वह लोगों को अपना शिकार बनाती है। साथ ही आज की दुनिया में लोग हसद और बदला लेने के लिए जादू टोना करवाते हैं। इसकी शेफ़ा यहां (रिहाई) से मिलती है और लोग ठीक हो जाते हैं।
समीउल्लाह ने बताया कि यहां सभी धर्मों के लोग आते हैं। उर्स के पहले दिन जब हज़रात का गुस्ल कराया जाता है तो वह गुस्ल का पानी सभी जायरीनों में तकसीम किया जाता है। इसे लेने के लिए लोग दूर दराज़ से आते हैं। इस गुस्ल के पानी से शफ़ायाब भी होता है। उन्होंने इस मज़ार को एकता के प्रतीक की संज्ञा दी। साथ ही बताया कि जिन लोगों का दिमाग कमज़ोर होता है या फिर बीमार होते हैं, उन सब को इस गुस्ल के पानी को पीने के बाद शेफ़ा मिलती है।
क्या कहते हैं डॉक्टर
चिकित्सक डॉ अरविंद माहेश्वरी ने बताया कि जो लोग मानसिक पीड़ा से गुजरते हैं और भूत प्रेत पर यकीन करते हैं, वह लोग ऐसी जगहों पर मानसिक तौर पर आकर ठीक महसूस करते हैं। दरअसल, वह बीमार नहीं होते उनकी सोच बीमार होती है। यह चमत्कारी शक्ति कभी-कभी उनको नुकसान भी पहुंचा जाती है।
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