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मजूमदार थे अंग्रेजी हटाओ आंदोलन के अगुआ, इंदिरा ने सदन में दिया था बयान

Dainik Bhaskar

Sep 14, 2015, 12:05 AM IST

इंदिरा गांधी ने भाषण दिया और हिंदी के पक्ष में लिए गए निर्णय के बाद यह आंदोलन समाप्त हुआ।

फाइल फोटो: आंदोलन में भाषण देेते मजूमदार। फाइल फोटो: आंदोलन में भाषण देेते मजूमदार।
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वाराणसी. इस साल हिंदी दिवस (14 सितंबर) काफी चर्चा में है। इसका कारण है कि भारत में 30 साल बाद 10वां विश्व हिंदी सम्मेलन 10 से 12 नवंबर तक भोपाल में मनाया गया। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित हिंदी के जानकारों ने हिंदी के हित में अपनी बातें रखी। ऐसे ही नवंबर 1967 में बीएचयू के छात्रनेता देवव्रत मजूमदार (डी. मजूमदार) के नेतृत्व में हिंदी के लिए 'अंग्रेजी हटाओ आंदोलन' की शुरुआत की गई थी, जिसका असर पूरे देश पर पड़ा। इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राज्यसभा में इस बाबत भाषण दिया और हिंदी के पक्ष में लिए गए निर्णय के बाद यह आंदोलन समाप्त हुआ।
26 जनवरी 1965 में संसद द्वारा यह प्रस्ताव पारित किया गया कि 'हिंदी सभी राजकीय प्रयोजनों में प्रयुक्त होगी। लेकिन, इसके साथ-साथ अंग्रेजी भी सह-राजभाषा के रूप में प्रयुक्त होती रहेगी।' इसके परिणामस्वरुप हिंदी मात्र राजभाषा बन कर रह गई। इतना ही नहीं इसके बाद 1967 में 'भाषा संशोधन विधेयक' लाकर अंग्रेजी का प्रयोग अनिवार्य बना दिया गया और विधेयक की धारा 3(1) में हिंदी के प्रयोग की चर्चा तक नहीं की गई। उस समय इंजीनियरिंग के छात्र डी. मजूमदार बीएचयू छात्रसंघ के अध्यक्ष थे। उन्होंने सबसे पहले अंग्रेजी का विरोध किया और नवंबर 1967 में आंदोलन की शुरुआत की।
बनारस में हुई पूर्ण हड़ताल
28 नवंबर 1967 को डी. मजूमदार के आह्वान पर बनारस में राजभाषा संशोधन विधेयक के विरोध में पूर्ण हड़ताल हुई। सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान और बाजार बंद रहे और गलियों-चौराहों पर मशाल जुलूस निकले।
एसएसपी सहित छात्र हुए घायल
29 नवंबर 1967 को उनके नेतृत्व में एक मशाल जुलूस निकाला गया। इसमें पुलिस और और प्रदर्शनकारियों के बीच नोकझोंक के बाद आंसू गैस के गोले छोड़े गए। इसमें 50 से अधिक छात्र और बनारस एक एसएसपी, पुलिस कप्तान सहित कई जवान भी घायल हुए। इसके बाद कई सीनियर छात्रनेता अरेस्ट हुए, लेकिन आंदोलन को धार देने के लिए डी. मजूमदार अंडरग्राउंड हो गए।इसके बाद बनारस में कर्फ्यू लगा।
इंदिरा गांधी ने दिया था बयान
5 दिसंबर 1967 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राज्यसभा में वक्तव्य दिया कि 'हम विधेयक पर विचार-विमर्श को तैयार हैं और विधेयक पारित होने के पूर्व सरकार संसद सदस्यों की भावनाओं से भली भांति अवगत होनी चाहेगी, ताकि भाषा-समस्या का सर्वमान्य हल निकाला जा सके।'
क्या था मामला
14 सितंबर 1949 को भारत की संविधान सभा द्वारा देवनागरी लिपि में बोली जाने वाली हिंदी भारतीय संघ की राजभाषा घोषित की गई। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 में हिंदी को राष्ट्रभाषा का स्थान तो दिया गया, लेकिन 15 साल तक अंग्रेजी को राजभाषा के रूप में चलते रहने की व्यवस्था की गई। 15 साल बाद अंग्रेजी को राजकाज में समाप्त होना था और हिंदी सहित भारत की अधिमान्य प्रांतीय भाषाओं में कामकाज होना था।
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फाइल फोटो: भाषण देते मजूमदार। फाइल फोटो: भाषण देते मजूमदार।
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आजादी के बाद पहली बार सदन में दी गई सजा
अंग्रेजी हटाओ आंदोलन के समर्थक इंद्रदेव सिंह लोकसभा में भाषा विधेयक पर 'भारत माता की जय' और 'भाषा विधेयक वापस लो' का नारा लगाकर परचा फेंकते हुए गिरफ्तार हुए। सदन में उन्हें सादे कैद की सजा दी गई। आजादी के बाद यह पहली घटना थी जब किसी व्यक्ति को लोकसभा द्वारा सजा दी गई।
 
पूरे देश में फैल गया आंदोलन
बनारस की घटना के प्रतिक्रिया में इंदौर, भोपाल में भी अशांति के बाद कर्फ्यू लगाने पड़े। यह आंदोलन, मध्यप्रदेश, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब होते हुए पूरे देश में फैल गया। इसके बाद हिंदी साहित्य सम्मेलन और नागरी प्रचारिणी सभा, श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा जैसी शीर्षस्थ संस्थाओं ने भी आंदोलन का आह्वान किया। 
 
आगे की स्लाइड्स में पढ़िए पद्मविभूषण और पद्मश्री लौटाने की हुई घोषणा...
 
फाइल फोटो: अपनी पत्नी और बेटी के साथ मजूमदार। फाइल फोटो: अपनी पत्नी और बेटी के साथ मजूमदार।
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पद्मविभूषण और पद्मश्री लौटाने की हुई घोषणा
प्रख्यात साहित्यकार सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा, सेठ गोविंददास डॉ. राजकुमार वर्मा, रायकृष्ण दास, गोपाल प्रसाद व्यास, रामचंद्र वर्मा और अक्षय कुमार जैन ने राष्ट्रपति द्वारा प्रदत्त पद्मविभूषण और पद्मश्री की उपाधियां भाषा विधेयक के विरोध में वापस करने की घोषणा 
 
संसद के सामने हुए अरेस्ट
इसके बाद यूपी के पूर्व मंत्री और समाजवादी नेता जनेश्वर मिश्र, तात्कालीन भारतीय हिंदी साहित्य सम्मेलन के राष्ट्रीय सचिव श्यामकृष्ण पांडेय और डी मजूमदार सहित करीब 300 प्रदर्शनकारी संसद के सामने से अरेस्ट किए गए। सरकारी आंकड़े के हिसाब से देश में कुल 4057 लोग इस आंदोलन में गिरफ्तार हुए। 

आगे की स्लाइड्स में पढ़िए क्या निकले थे नतीजे...
 
फाइल फोटो: इंदिरा गांधी। फाइल फोटो: इंदिरा गांधी।
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ये नतीजे निकले

16 दिसंबर 1967 को राजभाषा विधेयक और भाषा-नीति प्रस्ताव पर लोकसभा ने अपनी मुहर लगा दी। इसके अंतर्गत अंग्रेजी तो बनी रही, लेकिन कुछ नतीजे भी निकले।

1. केंद्रीय लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में क्षेत्रीय भाषाओं को माध्यम के रूप में प्रयोग करने की प्रक्रिया अक्टूबर 1968 से प्रारंभ होगी।
2. जब तक सरकारी कर्मचारियों को हिंदी का काम-चलाऊ ज्ञान नहीं हो पाएगा तब तक अंग्रेजी तथा हिंदी पत्रों का अनुवाद भेजा जाएगा।
3. फाइलों में हिंदी की टिप्पणियां लिखना जारी रहेगा।
4. केंद्रीय सरकार जो पत्र हिंदी में पाएगी, उसका उत्तर हिंदी में ही देगी।
5. हिंदी के विकास के लिए जो नीति स्वीकार की गई है, उसे क्रियान्वित किया जाएगा।
6. प्रत्येक मंत्रालय में एक अनुवाद विभाग रहेगा।
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फाइल फोटो: आंदोलन में भाषण देेते मजूमदार।फाइल फोटो: आंदोलन में भाषण देेते मजूमदार।
फाइल फोटो: भाषण देते मजूमदार।फाइल फोटो: भाषण देते मजूमदार।
फाइल फोटो: अपनी पत्नी और बेटी के साथ मजूमदार।फाइल फोटो: अपनी पत्नी और बेटी के साथ मजूमदार।
फाइल फोटो: इंदिरा गांधी।फाइल फोटो: इंदिरा गांधी।
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