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जानिए काशी विश्वनाथ मंदिर पर किसने किया था आक्रमण, फिर क्या हुआ?

8 वर्ष पहले
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वाराणसी. द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख काशी-विश्वनाथ मंदिर अनादिकाल से काशी में है। शास्त्रों में मिलता है कि वर्तमान के विशेश्वर गंज में दिव्य ज्योति साक्षात बाबा विश्वनाथ के रूप में दिखाई पड़ती थी। इसीलिए आदिलिंग के रूप में अविमुक्तेश्वर को ही प्रथम लिंग माना गया है। इसका उल्लेख महाभारत और उपनिषद में भी किया गया है।
बाबा विश्वनाथ के इतिहास से जुड़ीं कई ऐसी बातें हैं, जिनकों शायद बहुत कम लोग ही जानते होंगे। डॉ. एएस भट्ट ने अपनी किताब 'दान हारावली' में इसका जिक्र किया है कि बादशाह अकबर के बाद टोडरमल ने मंदिर का पुनर्निर्माण 1558 में करवाया था। 1669 में औरंगजेब ने आक्रमण कर इस मंदिर को क्षति पहुंचाई थी। 1777 में इंदौर की राजकुमारी अहिल्या बाई द्वारा इस मंदिर का जीर्णोद्वार करवाया गया था।
विश्वनाथ मंदिर का प्राचीन इतिहास
वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ भट्टाचार्या ने बताया कि अनादिकाल से बाबा काशी में विराज रहे हैं। धर्मग्रंथों में महाभारत काल से भी पहले का वर्णन मिलता है। इतिहास की किताबों में 11 से 15वीं सदी के कालखंड में मंदिरों का जिक्र और उसके विध्वंस की बातें भी सामने आती हैं। मोहम्मद तुगलक (1325) के समकालीन लेखक जिनप्रभ सूरी ने किताब 'विविध कल्प तीर्थ' में लिखा है कि बाबा विश्वनाथ को देव क्षेत्र कहा जाता था। लेखक फ्यूरर ने भी लिखा है कि फिरोज शाह तुगलक के समय कुछ मंदिर मस्जिद में तब्दील हुए थे। 1460 में वाचस्पति ने अपनी पुस्तक 'तीर्थ चिंतामणि' में वर्णन किया है कि अविमुक्तेश्वर और विशेश्वर एक ही लिंग है।
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