फोटो: जागेसरी, जिसे डायन कहकर काट दी गई जुबान।
ह्यूमन राइट्स डे: हर साल 10 दिसंबर को 'ह्यूमन राइट्स डे' मनाया जाता है। यूपी में कई ऐसी जगह हैं, जहां आज भी लोग अपने अधिकारों से वंचित हैं। निजी स्वार्थ के चलते उनपर अत्याचार किया जा रहा है। इस कड़ी में dainikbhaskar.com आपको ऐसी घटनाओं से रूबरू करा रहा है।
वाराणसी. 'डायन' एक ऐसा शब्द जो किसी भी महिला के लिए अभिशाप से कम नहीं हैं। आधुनिकता की चादर ओढ़े हम भले ही कितनी भी तरक्की कर लें, समाज का एक तबका आज भी रूढ़िवादिता को आगे लाकर महिलाओं पर निजी स्वार्थ की वजह से अत्याचार कर रहा है। पूर्वांचल के अति पिछड़े जिले सोनभद्र की कई महिलाओं को डायन की संज्ञा देकर किसी की जुबान काट ली गई तो किसी के मुहं पर कालिख पोतकर पूरा गांव घुमाया गया।
'ह्यूमन राइट्स डे' के मौके पर dainikbhaskar.com की टीम ऐसी है पांच महिलाओं के संघर्ष की कहानी आपको बता रहा है। इनमें से तीन को मानवाधिकार जन निगरानी समिति के सहयोग से ह्यूमन राइट कमीशन के ऑर्डर के बाद राज्य सरकार से तीन लाख रुपए की सहायता राशि भी जल्द ही मिलनी है।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबित, साल 2008 में अलग-अलग जगहों पर करीब 800 महिलाओं को डायन चिंहित कर उनपर जुल्म ढाया गया। सोनभद्र म्योरपुर ब्लॉक के करहिया गांव की रहने वाली जगेसरी देवी, बलियारीपुर की रहने वाली सोमारी देवी और मनबसिया देवी। इनके साथ घटित डायन प्रथा की घटना को संस्था द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में निष्पक्ष कार्यवाही और जांच-पड़ताल के लिए भेजा था। राज्य सरकार द्वारा कोई मजबूत कार्यवाही व जांच-पड़ताल नहीं करने के कारण राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार को यातना से पीड़ित इन महिलाओं को तीन- तीन लाख रुपए का मुआवजा देने का निर्देश दिया। साथ ही, छह सप्ताह में कार्यवाही कर आयोग को रिपोर्ट प्रेषित करने का आदेश दिया।
जागेसरी- जुबान काटकर बना दिया बेजुबान
जागेसरी देवी अब बोल नहीं सकती, क्योंकि जालिमों ने उनकी जुबान को डायन की संज्ञा देकर साल 2011 में पूरे पंचायत के सामने ही काट लिया था। जागेसरी देवी को उनका हक दिलाने और लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने वाली संस्था मानवाधिकार जन निगरानी समिति संयोजिका श्रुति रघुवंशी ने बताया कि जब उन लोगों को पता चला तो उनकी टीम करहिया गांव पहुंची। जागेसरी देवी के पति रमाशंकर ने बताया कि आठ बीघे जमीन के विवाद को लेकर उसकी पत्नी को रिश्तेदारों ने डायन बताकर जुबान काट दिया। चचेरी बहन और बहनोई सहदेव के पांच बच्चे थे। बीमारी के कारण तीन बच्चों की मौत हो गई। सहदेव ने जागेसरी को कुलटा और डायन बताकर पूरी पंचायत बुला ली। भरी पंचायत में ओझा के सामने जीभ को ब्लेड से काट दिया। श्रुति रघुवंशी ने बताया कि गांव इतना पिछड़ा हैं कि लोग पुलिस के पास भी नहीं जाते। फिलहाल, पंचायत के दबाव और सहदेव के आतंक को अगूंठा दिखाते हुए जागेसरी आज भी उसी जमीन पर खेती कर रही है। जागेसरी आज भी बेजुबान हैं।
आगे पढ़िए अन्य महिलाओं के संघर्ष की कहानी...