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तीन किमी पत्थरों को खोदकर अनपढ़ आदिवासी महिलाओं ने गांव में पहुंचाया पानी

7 वर्ष पहले
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ह्यूमन राइट्स डे: हर साल 10 दिसंबर को 'ह्यूमन राइट्स डे' मनाया जाता है। यूपी में कई ऐसी जगह हैं, जहां आज भी लोग अपने अधिकारों से वंचित हैं। निजी स्वार्थ के चलते उनपर अत्‍याचार किया जा रहा है। इस कड़ी में dainikbhaskar.com आपको ऐसी घटनाओं से रूबरू करा रहा है।
फोटो: नहर के सामने बैठी महिलाएं।
वाराणसी/मीर्जापुर. लालागंज ब्लाक के सेमरा आराजी गांव की दर्जनों महिलाएं आज भी लोगों के लिए मिसाल बनी हुई हैं। पानी के लिए बेहाल यहां की महिलाओं ने तीन किमी लंबे पत्थरों के बीच नहर खोदकर पानी को गांव तक पहुंचा दिया। दूर जंगल से गांव तक पानी का स्रोत लाने में उन्हें तीन साल लग गए। अनपढ़ महिलाओं का यह प्रयास गांव के लिए वरदान साबित हुआ है।

सेमरा गांव की महिलाएं लंबे अरसे से पानी की समस्याओं के लिए जूझ रही थीं। इसे देखते हुए 2009 में उन्होंने पत्थरों के बीच नहर खोदने की योजना बनाई। जंगल में पत्थरों को तोड़ कर गांव की अनपढ़ महिलाओं ने पानी निकाला और नहर बनाकर नवंबर 2012 में गांव तक पानी पहुंचा दिया।
नहीं मिली कोई सरकारी मदद
समाजसेवी अरुण उपाध्याय ने बताया कि जंगल में बह रहे प्राकृतिक स्रोत से गांव में पानी लाकर महिलाओं ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इच्छा शक्ति से सबकुछ संभव है। मेहनत और लगन से कठीन मंजिल भी पाया जा सकता है। वहीं, आदिवासी महिला नेमी ने कहा कि कई बार मांगने के बावजूद सरकारी मदद नहीं मिली। उन्होंने बताया कि जब भी समय मिलता था तो महिलाओं का समूह प्राकृतिक स्रोत से गांव तक पानी लाने के लिए पत्थरों पर खुदाई करती थीं।

फसलें भी अब लहलहा रही हैं
आदिवासी महिला बिमला बताती हैं कि तीन साल से ज्यादा समय मेहनत करने के बाद नहर का पानी गांव तक पहुंच पाया। इसके साथ ही सीमा बताती हैं कि दिन-रात कड़ी मेहनत के बाद पानी मिलने से गांव में पेयजल के साथ ही खेतों की सिंचाई होने से अब फसलें भी लहलहा रही हैं।

आगे पढ़िए गांव में पीने का पानी तक नहीं था...