वाराणसी. सिटी पैलेस म्यूजियम जयपुर की निदेशक डॉ. चंद्रमणि सिंह काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कला संकाय शुक्रवार को पहुंचीं। यहां उन्होंने भोजपुरी अध्ययन केंद्र में राहुल ग्रंथागार और लोककला संग्रहालय निरीक्षण किया। उन्होंने पुस्तकालय एवं संग्रहालय को विकसित करने का सुझाव दिया और अपना निजी संग्रहालय भोजपुरी अध्ययन केंद्र को देने का वचन भी दिया।
डॉ. चंद्रमणि सिंह के मुताबिक, 'मुझे बहुत अच्छा लगा। पुरानी स्मृतियां ताजा हो गईं। शादी-ब्याह में जाना, गीत-गाना सब कुछ याद आने लगा। लड़कपन में मौनी, कुरई में भूजा-मीठा खाते हुए दिन ताजे हो जाते थे। गांव की बहुत सारी वस्तुएं, जो आज दिखाई नहीं पड़ती हैं, वे इस संग्रहालय में देखी जा सकती हैं।'
डॉ. चंद्रमणि सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में भाषा, साहित्य और संस्कृति की जो स्थिति है, उसे देखते हुए लोकभाषाओं और लोकसंस्कृति में एक बड़ी संभावना दिखाई देती है। समग्रता में भोजपुरी का यह केंद्र उसी को प्रतिध्वनित कर रहा है। भोजपुरी 20 करोड़ लोगों की भाषा है। केंद्र के समन्वयक, प्रो. सदानंद शाही, सहसमन्वयक, प्रो. अवधेश प्रधान, शोध छात्रा एवं कर्मचारियों से बातें कर बहुत प्रभावित हुईं, वे लोग बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।
डॉ. चंद्रमणि सिंह ने आगे बताया कि लोक कलाओं और लोक भाषाओं को बचाना आज हमारा कर्तव्य बन गया है। नहीं तो ये विलुप्त हो जाएंगीं। हम नई पीढ़ी एवं शोधार्थियों के सहयोग अध्ययन, जागरुकता एवं जानकारी से ही सांस्कृतिक धरोहर का सरंक्षण कर सकते हैं, क्योंकि यह हमारी अस्मिता एवं गौरव का प्रतीक है। इस दिशा में केंद्र का कार्य अद्भुत है।
फोटोः डॉ. चंद्रमणि सिंह, निदेशक, सिटी पैलेस म्यूजियम जयपुर।