वाराणसी. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपनी भारत यात्रा पर बुधवार को अहमदाबाद पहुंचे। इसे पीएम
नरेंद्र मोदी की मजबूत विदेश नीति के रिजल्ट के तौर पर देखा जा रहा है। इसमें भारत और चीन के बीच कई व्यापारिक समझौता होने की उम्मीद है। इस मौके पर dainikbhaskar.com आपको बताने जा रहा है कि मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से चीन का पुराना रिश्ता रहा है। जिले के सारनाथ में ही भगवान गौतम बुद्ध ने पहला उपदेश दिया था। यहां उनका चीनी कारीगरों द्वारा बना मंदिर है, जिसे 1939 में चीन के फूकियन के रहने वाले श्रीयुट्ली चूं सैंग ने बनवाया था।
वाराणसी के सारनाथ में गौतम बुद्ध की तीन अलग-अलग मूर्तियां हैं, जो कि चाइनीज और थाई शैली में बने हैं। सारनाथ में भंते कुल प्रदीप ने बताया इस अद्भुत मंदिर को साल 1939 में चीनी कारीगरों ने बनाया था। मंदिर कई एकड़ में फैला हुआ है। यहां बने मूर्तियों को बनाने के लिए प्रयोग किए गए पत्थर को चीन और म्यांमार से मंगाया गया था। चीन के कारीगरों ने ब्रुसनी आर्ट शैली से कारीगरों ने नक्काशी कर इसे बनाया था।
चीनी बौद्ध भिक्षु ने मंदिर को बनाने में दिया था चंदा
भंते सिमोरी ने बताया कि मंदिर का जब निर्माण कार्य शुरू हुआ तो विश्व भर में रहने वाले चीन के भिक्षुओं ने चंदा दिया था। इसके बड़े हॉल के ठीक बीच में भगवान बुद्ध की मूर्ति को जब स्थापित किया गया तो उस समय वहां सैकड़ों चीनी लोग मौजूद थे। मंदिर का मुख्य द्वार और पूरी बाउंड्री साल 1952 में चीनी भक्तों द्वारा बनवाया गया था। यह मंदिर वहां से आने वाले पर्यटकों के आस्था का केंद्र है।
अद्भुत है, हजारा लाइटिंग
चीन के लोग ने ब्रुसनी क्राफ्ट की नक्काशी को हजारा लाइटिंग दीपक में भी दिया है। इसकी खासियत है कि हर लाइट में इसमें भगवान बुद्ध दिखेंगे। मान्यता है कि भक्त भगवान को छूकर जो भी कामना करता है, वह जरूर पूरी होती है। चाइना के पांच प्रमुख धर्म गुरुओं मोजी, मेन्सी, लोलाओजी, कन्फ्यूसियस, ज्वांगजी की पेंटिंग भी मंदिर के अंदर रखी गई है।
आगे देखिए चाइनीज मंदिर की तस्वीर ...