फाइल फोटो: काशी विश्वनाथ का दुग्धाभिषेक करते पुजारी।
वाराणसी. द्वादश ज्योतिर्लिंगों में एक श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में जल्द ही तिरुपति बाला जी के तर्ज पर गुप्त दान के लिए कुबेर दान पेटिका लगाई जाएगी। मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने बताया कि यहां भारत के कोने-कोने से भक्त आते हैं। गुप्त दान की व्यवस्था न होने के कारण श्रद्धालु चाह कर भी सोना, चांदी, हीरा और जवाहरात नहीं दान कर पाते हैं। उन्होंने बताया कि गुप्त दान के लिए कुबेर दान पात्र के लिए शासन को पत्र लिखा जा रहा है। साथ ही रात में (02.15 बजे) होने वाली मंगला आरती के समय में परिवर्तन की मांग की गई है।
आचार्य अशोक द्विवेदी ने बताया कि बाबा के दरबार में 21 दान पेटियां लगी हैं। इसे बढ़ाकर 42 करने के लिए शासन को पत्र भेज दिया गया है। इतना ही नहीं तिरुपति बालाजी में गुप्त दान के लिए कुबेर का भंडारण (गुप्त दान पात्र ) लगा है। श्री काशी विश्वनाथ के दर्शन को हजारों ऐसे भक्त आते हैं, जो गुप्त दान करना चाहते हैं। ऐसे में गुप्त दान में सोना, चांदी, जवाहरात तक दान में दिए जाते हैं। उनके लिए जल्द कुबेर का गुप्त दान पात्र लगाने की व्यवस्था की जा रही है।
मंगला आरती के समय और मंत्रों में त्रुटि
आचार्य अशोक द्विवेदी ने बताया कि मंगला आरती मंदिर में किस समय करना चाहिए इसका पालन नहीं किया जा रहा है। घंटों की नाद से पहले बनारस मंगला आरती के समय जाग उठता था। रात्रि में धर्म शास्त्र के अनुसार 02.15 पर आरती कहा होता है, इसका वर्णन कहीं नहीं मिलता। साथ ही आरती के समय मंत्रोचारण में भी अर्चकों द्वारा काफी त्रुटियां पाई गई हैं। न्यास परिषद लिखित रूप से श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य और अन्य शंकराचार्यों से शास्त्रगत समय जानने के लिए पत्र लिख रहा है। साथ ही नौ अक्टूबर को खुले मंच पर काशी के विद्वान इकठ्ठा होकर अपनी बातों को रखेंगे।
त्रुटिपूर्ण पूजन सामग्री चढ़ाया जा रहा बाबा को
आचार्य अशोक द्विवेदी ने बताया कि बाबा का श्रृंगार भी त्रुटिपूर्ण सामग्रियों द्वारा किया जा रहा है। सामग्रियों की शासन द्वारा जांच की मांग की जाती है। मिलावटी सामग्रियों से बाबा के शिवलिंग का क्षरण हो रहा है। बाबा को जो भष्म अर्पित किया जाता है, वो भी बाहर से लाया जाता है, जो कि शुद्ध नहीं होता है। उन्होंने बताया कि तीन जून को हुई न्यास परिषद की बैठक में भष्मीशाला खोलने की बात कही गई थी, जो आज तक नहीं हुआ।
आगे पढ़िए मंदिर की नियमावली बनाने की मांग...