भदोही/वाराणसी. भारत सरकार की वित्त पोषित न्यूट्री फार्म योजना के तहत कुपोषण को कृषि के माध्यम से दूर किया जाएगा। इसके लिए यूपी के 32 जिलों का चयन हुआ है। इसमें भदोही में गेहूं और बाजरा की ऐसी किस्मों की फसल पैदा की जाएगी जो कुपोषण को दूर करने में कारगर होगी। कृषि विभाग ने योजना पर अमल करना भी शुरू कर दिया है।
देश में कुपोषण की दर लगातार बढ़ रही है। इसकी वजह से कुपोषित महिलाएं ऐसे बच्चों को जन्म देती हैं जो पैदा होते ही बुद्धिबाधित या पतले होते हैं। कुपोषण को रोकने के लिए चिकित्सा के क्षेत्र में तो कई कदम उठाए जा रहे हैं लेकिन अब कृषि के माध्यम से भी बड़े पैमाने पर काम किया जा रहा है। न्यूट्री फार्म योजना के तहत भदोही में दो फसलों का चयन किया गया है। इन फसलों में खरीफ की बाजरा और रवि की गेहूं है।
इन अनाजों से लगेगी कुपोषण पर लगाम
योजना में फसलों की ऐसी प्रजातियों की खेती कराई जा रही है जो कुपोषण को रोकने में कारगर है। इन प्रजातियों में बाजरा और गेहूं की एच डी 2967, शताब्दी, हलना, मगहर, देवा, उजियार, राज 4037, राज 3777, राज 3077, राज 4120 और बाजरा है। इन प्रजातियों में आयरन, मैग्नीज और जिंक जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। माना जाता है की अगर ये तत्व शरीर को मिलते हैं तो कुपोषण नहीं हो सकता है।
कृषि विभाग ने दिए किसानों को बीज
भदोही के कृषि विभाग ने बाजरा 300 हेक्टेयर और गेहूं 480 हेक्टेयर में पैदावार का लक्ष्य रखा है। विभाग के मुताबिक, उन्होंने किसानों को इन प्रजातियों का बीज उपलब्ध कराया है और अनुमान लगाया जा रहा है की अच्छी पैदावार होगी। जानकारों की मानें तो इन तरह की प्रजातियों की फसल की पैदावार बढ़ती है और लोगों तक यह अनाज पहुंचता है तो कुपोषण पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकती है। उप कृषि निदेशक डॉ. आर.पी. मौर्या ने बताया कि पोषण की कमी से कुपोषण होता है। इन अनाजों में जो तत्व है वह पोषण को पूरा करते हैं। विभाग प्रयास कर रहा है की इन प्रजातियों का अनाज ज्यादा से ज्यादा लोगों को उपलब्ध हो।
फोटो: न्यूट्री फार्म योजना का पोस्टर।