वाराणसी. मौनी अमावस्या यानि भगवान ब्रह्मा के स्वयंभू पुत्र ऋषि मनु, इन्होंने आजीवन मौन रहकर तपस्या की थी। इसीलिए आज की इस तिथि को मौनी अमावस्या कहा जाता। इस पावन पर्व का वर्णन गोस्वामी तुलसी दास ने भी रामचरित मानस में किया है।
मान्यताएं है कि इस पावन दिन
स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन पवित्र संगम में देवताओं का निवास होता है। इसलिए इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इस मास को भी कार्तिक के समान पुण्य मास कहा गया है। स्नान के महापर्व मौनी अमावस्या के दिन स्नान को लेकर धार्मिक नगरी काशी में श्रद्धालुओं का मेला लगा हुआ है।
प्रख्यात ज्योतिषाचार्य रमन पांडे ने बताया कि इस दिन स्नान करने से तन की शुद्धि, मौन रहने से मन की शुद्धि और दान देने से धन की शुद्धि और वृद्धि होती है। मौनी अमावस्या का अर्थ होता है कि इस दिन व्यक्ति मौन रहकर गंगा में स्नान करें।
बीएचयू ज्योतिष विभाग के प्रो. सुभाष पांडे ने बताया कि इस दिन स्नान करने से दैहिक (शारीरिक), भौतिक (अनजाने में किया पाप), दैविक (ग्रहों गोचरों का दुर्योग) तीनों प्रकार के मनुष्य के पाप दूर हो जाते हैं। मान्यताएं है कि आज के दिन स्वर्ग लोक के सारे देवी-देवता गंगा में वास करते हैं। जो पापों से मुक्ति देते हैं।
इस महापर्व पर दान का भी बहुत महत्व है इस दिन विशेषकर के कंबल, तिल, अक्षत, घी और अन्न दान कर भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए। काशी के गंगा में आस्था की डुबकी लगाने को लेकर अनुमानतः 1 लाख श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगाने आए हैं।
आगे देखें मौनी अमावस्या के सुबह स्नान करते श्रद्धालु...