वाराणसी. देश के इतिहास में पहली बार किसी राज्य के मुख्यमंत्री का जबरदस्त स्वागत देश की राजधानी दिल्ली ने किया। लोगों ने अप्रत्याशित तरीके से प्रधानमंत्री के गद्दी पर
नरेंद्र मोदी को बिठा दिया। बुधवार को मोदी का 64वां जन्मदिन है। इस मौके पर काशी के विद्वानों ने बताया कि मोदी की जन्म कुंडली में ऐसे सितारे यानि योग बने कि एक मामूली से चाय बेचने वाले बच्चे को पहले सीएम फिर पीएम की गद्दी मिली।
वाराणसी के वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य पं. दीपक मालवीय ने मोदी की जन्मकुंडली पर शोध कर कुछ ऐसे तथ्य निकाले जो वाकई दिलचस्प थे। उन्होंने पाया कि लग्न लग्नेश, पंचम भाव पंचमेश, और नवम भाव में गुरु का प्रभाव है। द्वादश भाव में केतु है, जो नवमेश बुद्ध तथा लग्नेश के सूर्य प्रभाव का है। इन योगों की वजह से ही मोदी को इतनी ख्याति मिली है। dainikbhaskar.com नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर उनके जन्म से लेकर पीएम बनने तक के सफर को जन्मकुंडली के योगों के जरिए प्रस्तुत कर रहा है।
इन योगों ने जगाया मोदी में देशप्रेम
तत्कालीन मुंबई स्टेट के मेहसाणा जिले के गांव वडनगर में 17 सितंबर 1950 को मूलचंद मोदी के घर किलकारी गूंजी। जब उनके बेटे दामोदरदास की पत्नी हीराबेन ने एक तेजस्वी बालक को जन्म दिया। साधारण सा दिखने वाले इस बच्चे का बचपन चाय बेचते गुजरा। नरेंद्र मोदी जब आठ साल के हुए तो शनि में गुरु की अंतर्दशा ने प्रभावित किया और आरएसएस से देश प्रेम की भावना से जुड़ गए।
मोदी का मिला उनका गुरु
उसी दौरान वह वकील साहब नाम से प्रसिद्ध लक्ष्मण राव के संपर्क में आए। वह मोदी के राजनैतिक गुरु और मार्गदर्शक बने। मोदी बाद में में तत्कालीन जनसंघ के नेता बसंत गजेंद्र गाड़कर और नाथालाल लाल जागड़ा के संपर्क में आए। वे लोग बाद में गुजरात भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक बने।
आगे जानिए किस वजह से नहीं मिला मोदी को वैवाहिक सुख...