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'जिस्म की मंडी में आज धंधे पर बैठी होती और मेरी बोली लगती'

8 वर्ष पहले
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वाराणसी. 'किस्मत ने मेरा साथ दिया और भगवान ने मुझे बचा लिया, नहीं तो मैं भी जिस्म की मंडी में आज धंधे पर बैठी होती और मेरी बोली लगती।' यह कहना है नगर से सटे शिवदासपुर रेडलाइट एरिया निवासी सरोज (बदला हुआ नाम) का। सरोज उस बदनाम गली में एक उम्मीद की किरण है।
उसने वहां के दलालों को मुंहतोड़ जबाब दिया और आज 70 से अधिक बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रही है। ये सभी बच्चे शिवदासपुर रेडलाइट एरिया और उसके पास के गांवों के रहने वाले हैं। सरोज उन्हें निःशुल्क पढ़ाती है। वह उन्हें शिक्षित कर सामाजिक सरोकारों से जोड़ने चाहती है।
जब सरोज 14 साल की थी, तभी दलालों ने उसकी बोली लगवा दी थी। एक सामाजिक संस्था की पहल पर सरोज बदनाम गली के दलदल में फसने से बच गई। सरोज का मानना है कि रेड लाइट एरिया में पैदा होना कोई गुनाह नहीं है। सरोज आज भी परिजनों के संग इसी बदनाम गली में रहती है।
ऐसे बच्ची के सामने ही लूटती मां की अस्मत, जानिए तस्वीरों के जरिए...

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