वाराणसी. सारनाथ में 1836 को शुरू हुई खुदाई लगभग सौ वर्षों तक चली जो 1932-33 के आस-पास बंद हुई। ब्रिटिश अधिकारी एलेक्जेंडर कनिंघम ने सारनाथ और उसके आस-पास खुदाई प्रारंभ करवाई थी। 1904 में ब्रिटिश सर्वेयर एसएफ ऑर्टल के समय जब खुदाई चल रही तभी अशोक स्तंभ मिला, जो उसी समय से खंडित था।
भगवान बुद्ध से जुड़े स्थलियों पर सम्राट अशोक ने तमाम स्तंभ और शीला लेख लगवाए थे, जो आज इतिहास की अनमोल धरोहर हैं। यहीं पर मिले अशोक स्तंभ से सिंघों को राजचिन्ह और अशोक चक्र को तिरंगे पर सुशोभित किया गया।
जानिए कैसे मिला देश को राजचिन्ह और तिरंगे पर बना चक्र