कई घटनाएं ऐसी होती हैं जिन पर विश्वास नहीं किया जा सकता, जैसे आत्माओं से संपर्क, पुनर्जन्म आदि। ऐसी ही घटनाओं की एक सीरीज काशी के कुछ लेखकों की पुस्तकों और प्राप्त अन्य जानकारियों के आधार पर शुरू की गई है। ये सच्ची घटना अरुण शर्मा की पुस्तक पर आधारित है।
इस कड़ी में प्रस्तुत है सच्ची कहानी पार्ट-5: वर्षों बाद खोपड़ी के संस्कार के बाद लड़की की आत्मा को मिली मुक्ति!
वाराणसी. यह एक ऐसी लड़की की कहानी है, जिसने एक तांत्रिक के चक्कर में आकर आत्महत्या कर ली थी।
कोलकाता की इस लड़की का रहस्य बनारस के शमशान घाट पर एक खोपड़ी मिलने के बाद खुला। महेश बाबू (बदला हुआ नाम) वर्ष 1950 के आस-पास पुनर्जन्म और मृत आत्माओं की सच्चाई पर तांत्रिकों के साथ मिल कर रिसर्च में जुटे थे। उन्होंने देखा कि कई तांत्रिक मृतक की खोपड़ी पर तांत्रिक क्रिया कर आत्मा को बुला लेते थे।
कोलकाता की मृत लड़की की खोपड़ी कैसे पहुंची काशी
इसी को लेकर महेश बाबू अपने शोध कार्य में लगे थे। कई सालों तक महेश और साधक महेंद्र बाबू (बदला हुआ नाम) अलग-अलग खोपड़ियों की आत्माओं से संपर्क साधते रहे। एक दिन शमशान घाट पर विचरण के दौरान दोनों को एक खोपड़ी मिली। इसके बाद बंद कमरे में रात को उन्होंने साधना शुरू की। एक लड़की की रोने की आवाज आने लगी और तभी सामने एक परछाई दिखती प्रतीत हुई।
आगे जानिए सुमन की आत्मा को कैसे मिली मुक्ति...