बताते चलें कि आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। इस बार दुर्गाष्टमी और नवमी तिथियां एक ही दिन पड़ने से विशेष संयोग बन रहा है। यह संयोग देवी मां के भक्तों के लिए धन और ऐश्वर्य लेकर आएगा। 25 सितंबर को घट स्थापना के साथ देश भर में नवरात्रि पर्व की धूम शुरू हो जाएगी। वहीं, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी को दुर्गा पूजा भी शुरू हो जाएगी। इस दौरान माता की चौकी भी लगाई जाएगी।
1. शैलपुत्री देवी: नवदुर्गा का पहला रूप शैलपुत्री का है। काशी के अलईपुरा इलाके में इनका मंदिर बना है। हिमालय के यहां जन्म लेने के कारण देवी का नाम शैलपुत्री पड़ा। शैलपुत्री देवी का वाहन वृषभ है। उनके दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल है। इन्हें पार्वती का स्वरूप भी माना जाता है। ऐसी मान्यता है की देवी के इस रूप ने ही शिव की कठोर तपस्या की थी। कहा जाता है कि इनके दर्शन मात्र से शादी में आ रही रूकावटें दूर हो जाती हैं।
आगे जानिए, देवी के किस स्वरूप की पूजा करने पर होती है साक्षात परब्रह्म की प्राप्ति...