वाराणसी. स्वामी अड़घड़ा नंद जी महाराज बुधवार को एयरइंडिया की विमान से दिल्ली से वाराणसी पहुंचे। उनके दर्शन और उपदेश को सुनने के लिए हजारों भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान उन्होंने राम कथा और अध्यात्म के महत्व पर उपदेश दिया।
एयरपोर्ट पर भक्तों को उपदेश देते हुए उन्होंने कहा कि देवी-देवता हमेशा से घोड़े, बैल, शेर, हंस और मोर की सवारी करते हैं। बैल में कोई ब्रेक नहीं था, फिर भी वे सुरक्षित नहीं थे। लेकिन, आज के परिवेश में लोग महंगी गाड़ियों की सवारी करते हैं फिर भी एक्सीडेंट कर देते हैं।
श्री राम बनवासी की बात बताई
स्वामी अड़घड़ा नंद जी महाराज ने कहाकि 14 साल का बनवास काट श्रीराम चंद्र, उनके छोटे भाई, माता सीता और 18 जुथप बंदर उसी पुष्पक विमान से घर लौटे थे। पुष्पक विमान में कितने लोगों को बैठा दिया जाता था, लेकिन उसकी एक सीट हमेशा खाली पड़ी रहती थी। उनके आराध्य देव महादेव के लिए रहती थी।
कथा सुनाया
स्वामी अड़घड़ा नंद महाराज ने कहा, 'भगवान श्रीराम चंद्रजी ने लक्ष्मण से पूछा कि क्या तुम मेरी बात मानोंगे तो सीता को लेकर जाओ जंगल में छोड़ कर चले आओ। पहले तो उन्होंने इनकार कर दिया, लेकिन राज आदेशानुसार उन्हें माता-सीता को जंगल मे छोड़ना पड़ा था। सीता राम के पुत्र लव कुश के सामने अयोध्या के एक से एक वीर नतमस्तक हो गए थे। बाद में भगवान श्रीराम ने उन्हें अपनाया था। इस दौरान सीता माता को अग्नि परीक्षा से भी गुजरना पड़ा था।
आगे पढ़िए क्या कहते हैं भक्त...