तस्वीर में: स्वामी प्रसाद मौर्या के पोस्टर की शव यात्रा निकालकर आग के हवाले करते शिवसैनिक कार्यकर्ता।
वाराणसी. बसपा के राष्ट्रीय महासचिव और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्या द्वारा शादी
विवाह में गौरी-गणेश की पूजा नहीं करने के दिए गए बयान से शिवसैनिकों में गुस्सा फूट पड़ा। सोमवार की दोपहर सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने मौर्या के पोस्टर की शव यात्रा निकाली। इसके बाद काशी के प्रसिद्ध अस्सी घाट पहुंचकर उनके पोस्टर को जूतों से पीटा और आग के हवाले कर दिया।
शिवसेना के प्रदेश युवा सेना के प्रभारी अरुण पाठक ने बताया कि जिस तरीके से स्वामी प्रसाद मौर्या ने हिन्दू देवी-देवताओं के बारे में अमर्यादित बातें की है, वह कतई क्षमा योग्य नहीं है। उनके इस कथन से बहुजन समाज पार्टी के ‘सर्वजन सुखाय सर्वजन हिताय’ नारे की पोल खुलती नज़र आर ही है। उनका यह बयान समाज विरोधी है। इसलिए वे बसपा सुप्रीमो से अपील करते हैं कि उन्हें तत्काल प्रभाव से अपनी पार्टी से बर्खास्त करें।
स्वामी प्रसाद मौर्या के बयान से काशी के लोग आहत
उन्होंने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्या को अपना मानसिक इलाज कराने की जरूरत है। वहीं, शिवसैनिक के कार्यकर्ता राजकुमार सेठ ने कहा कि स्वामी प्रसाद का बयान काशीवासियों को आहत किया है। उन्होंने धर्म को बांटने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बसपा सुप्रीमो और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों को चाहिए कि उन्हें बहुजन समाज पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दिलाकर सबक सिखाएं।
मौर्या ने दिया था ये बयान
बताते चलें कि बसपा के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्या ने रविवार को एक विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि शादियों में गौरी-गणेश की पूजा नहीं करनी चाहिए। यह मनुवादी व्यवस्था में दलितों और पिछड़ों को गुमराह कर उनको शासक से गुलाम बनाने की साजिश है। हिंदू धर्म में सुअर को ‘वराह’ भगवान कहकर सम्मान दे सकते हैं, गधे को भवानी, चूहे को गणेश और उल्लू को लक्ष्मी की सवारी कहकर पूज सकते हैं, लेकिन शूद्र को सम्मान नहीं दिया जाता। इस बयान को लेकर धार्मिक नगरी काशी में भी इसका जमकर विरोध हो रहा है।
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