वाराणसी. लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बुधवार को कर्मचारियों ने प्रदर्शन दिया। कर्मचारियों ने एयरपोर्ट का निजीकरण किए जाने को लेकर विरोध किया। उनका कहना था कि जिन एयरपोर्टों का निजीकरण हो चुका है, वहां पर भी सुविधाओं की कमी है। इसके बावजूद केंद्र सरकार एयरपोर्टों को हाथों की कठपुतली बनाना चाहती है। इस दौरान कर्मचारियों ने केंद्र सरकार द्वारा निजीकरण किए जा रहे चार एयरपोर्टों का भी उदाहरण दिया। इनमें कलकत्ता, चेन्नई, अहमदाबाद और जयपुर शामिल है।
बुधवार को वाराणसी एयरपोर्ट के सभी कर्मचारियों और यूनियन के पदाधिकारियों ने यूनियन के शाखा सचिव सुभाष तिवारी के नेतृत्व में पुराने टर्मिनल भवन से नए टर्मिनल भवन तक प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने उड्डयन मंत्री और भारत सरकार मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। उनका कहना था कि एयरपोर्ट किसी के हाथ की कठपुतली न बनें इसके लिए उनके निजीकरण पर रोक लगनी चाहिए। ज्ञात हो कि कलकत्ता, चेन्नई, अहमदाबाद और जयपुर के बाद वाराणसी एयरपोर्ट का निजीकरण होना है।
केंद्र सरकार पर लगाया आरोप
शाखा सचिव सुभाष तिवारी ने बताया कि लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भी केंद्र सरकार ने निजी कंपनियों के हाथ में देने का प्लान बना लिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अपने फायदे के लिए एयरपोर्ट का निजीकरण करना चाहती है। उनका मानना है कि अगर निजी हांथ मे ही देना था, तो आधुनिकीकरण क्यों किया गया। साथ ही उन्होंने सरकार को सलाह देते हुए कहा कि अगर निजीकरण करना है, तो बंद पड़े हवाई अड्डों का करें।
बंद पड़े एयरपोर्ट
सचिव सुभाष तिवारी की सलाह है कि शिमला, कुल्लू-मनाली,
जम्मू, लेह, अकोला, कानपुर जैसे हवाई अड्डों का उत्थान कर निजीकरण किया जाए। इन एयरपोर्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च नहीं हुआ है। ऐसे एयरपोर्टों का सौंदर्यीकरण निजी हांथ में देकर कराया जाए।
आगे पढ़िए कर्मचारियों के बल पर चमकता है एयरपोर्ट...