वाराणसी. बीपीएड डिग्री धारकों ने शारीरिक शिक्षा (बीपीएड) अध्यापक भर्ती की बहाली के लिए सोमवार को जमकर प्रदर्शन किया। साथ ही पीएम के संसदीय कार्यालय के बाहर बहाली के लिए नारेबाजी करते हुए पीएम के नाम ज्ञापन सौंपा। इसके अलावा तख्तियां में लिखा कि 'हमारा सांसद खो गया, हमारी फरियाद कौन सुनेगा'।
मेजर ध्यानचंद खेल उत्थान समिति द्वारा संचालित यूपी प्रशिक्षित बीपीएड संघर्ष मोर्चा की वाराणसी जिला इकाई के बीपीएड सदस्यों की मांग है कि प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूलों में शारीरिक शिक्षा अध्यापकों की भर्ती की बहाली की जाए। इसके लिए सदस्यों ने पीएम के संसदीय कार्यालय के बाहर जमकर प्रदर्शन किया और ज्ञापन दिया।
क्या कहते हैं अध्यक्ष
मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप यादव ने बताया कि शिक्षा के मौलिक अधिकार अधिनियम 2009 के तहत सभी बच्चों को मुफ्त शिक्षा पाने अधिकार है। इसके लिए केंद्रीय अधिनियम में इन बच्चों को शारीरिक शिक्षा दिए जाने का भी प्रावधान है। उन्होंने बताया कि यूपी सरकार ने पांच अप्रैल 2004 को शासनादेश जारी करके शिक्षा को अनिवार्य विषय के रूप में लागू किया, लेकिन उसके बाद भी आज तक किसी भी प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूल में शारीरिक शिक्षकों की भर्ती नहीं की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे निर्देश
इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा शासन को एक बार साल 2012 और फिर 21 मई 2014 को यह निर्देश दिया गया। इस आदेश के अनुपालन के लिए कोर्ट ने शासन को तीन महीने का समय भी दिया था। इसके बाद भी शासन ने आज तक किसी भी तरीके की नियुक्ति नहीं की है, जबकि साल 1998 से लेकर साल 2008 तक प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूलों में बीपीएड डिग्री धारकों को विशिष्ट बीटीसी के तहत सहायक अध्यापक के रूप में नियुक्ति दी गई है।
तस्वीर में: जूलूस निकालते हुए बीपीएड सदस्य।